ई०वी०एम० के दौर में भी पोस्टल बैलट पेपर की अहमियत

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बारा सगवर(उन्नाव ब्यूरो)– ऐसी वोटिंग भी प्रत्याशियों के सिरों पर जीत का सेहरा बांध देती है या फिर मतों में आगे चल रहे उम्मीदवार की गणित भी बिगाड़ देती है।आज के परिवेश में वोटो का दौर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के साथ भले ही जुड़ा हो लेकिन आज भी कई जगह से पोस्टर वैलेट पेपर के मत लगभग हर जनपद में पहुँचते है |
बड़ी बात यह है कि जहाँ प्रत्याशियों को जीत के लिए अपने क्षेत्र में एक-एक वोट के खातिर दो चार होना पड़ रहा दरवाजे-दरवाजे वोटो की गुहार लगानी पड़ती है। वही पोस्टल के माध्य्म से हजारो की सँख्या में हर विधान सभा में वोट आ जाते है।
हम बात कर रहे फौज के जवानों की जो सीमा पर या अपनी ड्यूटी के दौरान दूर दराज के इलाको में तैनात है। लेकिन वह भी वोट डालने का जज्बा जरूर रखते है और सरहदो से भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देने का काम करते है। जनपद के ऐसे मतदाता जो फौज में नौकरी करते है उन्हें चुनाव आयोग से पोस्टल बैलट पेपर के द्वारा मतदान की सुविधा दी जाती है।
देश की हर विधान सभा में हजारो सेना के जवान चुनाव के समय घर पर भले ही नही होते लेकिन अपने मत का प्रयोग वह पोस्टल बैलट के माध्यम से जरूर करते है। चुनाव अधिकारियो की माने तो सेना के जिन जवानों का पूरा पता प्रशाशन के पास होता है। उनको प्रत्याशियों के नामंकन एवं चुनाव चिन्ह आवंटन होने के बाद पोस्टल बैलट उनके पते पर भेज दिया जाता है । ई०वी०एम० मतों की गणना के बाद शाम पांच बजे तक जो भी पोस्टल बैलट पेपर प्राप्त होता है।उसकी गिनती अलग से की जाती है।

रिपोर्ट-दुर्गेश सिंह

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