चुनावी रंजिश को लेकर हुई हत्या में एक को दस वर्ष की कैद

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सुलतानपुर(ब्यूरो)- चुनावी रंजिश को लेकर हुई हत्या समेत अन्य आरोप में जिला एवं सत्र न्यायालय ने पूर्व ब्लाॅक प्रमुख व उनके एक भाई को बरी कर दिया है। जबकि उनके दूसरे भाई समेत तीन आरोपियों को मामूली धाराओं में दोषी करार दिया गया है। वहीं एक आरोपी को अदालत ने गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास एवं बीस हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

मामला संग्रामपुर थानाक्षेत्र का है। जहां के केशवपुर गांव निवासी अभियोगी राजेश सिंह ने 22 फरवरी 2002 की घटना बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आरोप के मुताबिक वह घटना के समय साढ़े 11 बजे दिन में अपने भाई हरिकेश सिंह व बुआ के लड़के विनोद सिंह उर्फ गुड्डू सहित अन्य के साथ जीप से अमेठी की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान पहले से ही घात लगाये बैठे पूर्व ब्लाॅक प्रमुख अरूण कुमार सिंह, उनके भाई महेन्द्र सिंह, धीरेन्द्र सिंह, उनके पिता जगदम्बा सिंह, सह आरोपी चन्द्रभान सिंह, कमलेश सिंह व रमेश सिंह निवासीगण पूरे जैतराम-कंसापुर थाना संग्रामपुर ने उनकी जीप को रोक लिया और चुनाव में बूथ कैप्चरिंग आदि के मुद्दे को लेकर हाथ में लिए हुए चाकू से अरूण कुमार सिंह ने विनोद को चाकू मार दिया। वहीं अन्य को भी चोटें आने की बात बताई गई। आई चोटों की वजह से विनोद सिंह की इलाज के लिए ले जाते समय ही मौत हो गई। इस मामले का विचारण जिला एवं सत्र न्यायालय में चल रहा था।

बताते चलें कि विचारण के दौरान पूर्व प्रमुख के पिता जगदम्बा की मृत्यु हो चुकी है। शेष छः आरोपियों के खिलाफ चल रही सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों को परीक्षित कराया। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविन्द सिंह राजा ने तीन गवाहों को पेश किया। बयान मुल्जिम में अभियुक्त रमेश सिंह ने आत्मरक्षा में गुप्ती से विनोद सिंह उर्फ गुड्डू की जान लेने के जुर्म को स्वीकार किया। तत्पश्चात जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार ने पूर्व प्रमुख अरूण कुमार सिंह व उनके भाई धीरेन्द्र प्रताप सिंह को दोषमुक्त करार दिया। जबकि आरोपी महेन्द्र प्रताप सिंह, चन्द्रभान सिंह व कमलेश सिंह को हत्या समेत अन्य धाराओं में दोषमुक्त करते हुए भादवि की धारा 325 का दोषी माना। जिन्हें प्रोबेशन पर छोड़ने का आदेश दिया। वहीं आत्मरक्षा में जुर्म स्वीकार करने वाले आरोपी रमेश सिंह को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए अदालत ने दस वर्ष के सश्रम कारावास व 20 हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

रिपोर्ट- संतोष यादव

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