बहादुरी के लिए राष्ट्रपति के द्वारा पुरस्कार पाने वाला 19 वर्षीय बच्चा आज सड़क पर सोने को मजबूर

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मात्र 12 वर्ष की उम्र में ही गणतंत्र दिवस के मौके पर जिस समय देश के बड़े-बड़े वीरों को भारत के महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा सम्मानित किया जाता हैं उस दिन अपनी बहादुरी के लिए वीरता

आज हम यहाँ बात कर रहे हैं उस छोटे से बच्चे के बारे में जिसने सितम्बर 2008 में दिल्ली में हुए सीरियल बम ब्लास्ट करने वालों को पकड़ने में दिल्ली पुलिस की मदद की थी I

देश के तमाम मासूमों की तरह मात्र 12 वर्ष की उम्र का छोटा सा बच्चा अपनी गरीबी और बदहाली से परेशान दो वक़्त की रोटी के लिए दिल्ली की सड़कों पर घूम-घूम कर गुब्बारे बेंचने पर मजबूर वह एक दिन दिल्ली के सबसे वी.आई.पी. एरिया कनाट प्लेस के बिलकुल नजदीक बाराखम्भा रोड पर खड़ा गुब्बारे बेंचने की कोशिश कर रहा था तभी उसने देखा की 2 लोग आटो से उतरे और उन्होंने नजदीक ही एक डस्टबिन में कुछ सामान रख दिया और वह आगे बढ़ गए I

देश की राजधानी दिल्ली में हुए इन सीरियल ब्लास्टों में तकरीबन 30 लोग की मृत्यु हो गयी थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे I उस समय देश इस 12 वर्षीय बच्चे ने ही पुलिस को इस बड़ी गुत्थी को सुलझाने में मदद की थी और न केवल मदद की थी बल्कि उन आतंकवादियों पहचान भी करवाई थी I

इसी उपलक्ष में देश के इस बहादुर बच्चे को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर वीरता पुरष्कार से सम्मानित किया गया था I उसके बाद सलाम बालक ट्रस्ट ने उस बच्चे को अपने यहाँ भर्ती कर लिया था I

अब 7 वर्षों के बाद भारत के उस बहादुर बच्चे को फिर से सड़क पर ही अपना जीवन गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ा हैं, क्योंकि जैसे ही वह 18 साल का हुआ सलाम बालक एन.जी.ओ. ने अपना पल्ला झाड़ते हुए उस बच्चे को फिर से छोड़ दिया हैं और आज वह एक बार फिर 12वी. की पढ़ाई को ख़तम करने के लिए संघर्ष कर रहा हैं I

लड़के ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत के दौरान कहा कि आज उसे पढने और रहने के लिए अगर एक जगह मिल जाए जहाँ से वह अपनी पढ़ाई कर सके तो शायद कुछ अच्छा हो पाए I

आज मदद की जरूरत इस होनहार बच्चे को हैं जो रहना तो चाहता हैं लेकिन उसके पास रहने के लिए घर नहीं है, वह पढना तो चाहता हैं लेकिन उसके पास पढने के लिए किताबे नहीं हैं, वह कुछ बनना तो चाहता हैं लेकिन बनने का कोई विकल्प शायद उसके सामने मौजूद ही नही है |

देश की सरकारें अगर इस आम बच्चे की तरफ जरा सा ध्यान आप दे पायें तो शायद ये होनहार कल हमें गौरवान्वित होने के कई और अवसर दे सके, और अगर हम ऐसी प्रतिभाओं को भी नही संभल सकते तो इस तरह की भीड़ में शामिल अन्य लाखों – करोड़ो बच्चों के उज्जवल भविष्य के दावों का अंदाजा तो अपने आप ही लग जाता है

 

 

SOURCE –    THE HUFFINGTON POST

 

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