शाम ढलते ही जंगल बन जाती हैं गलियाँ, शहर बना शराबियों का ठिकाना

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पैलीमेटा(छतीसगढ़ ब्यूरो)-  ग्राम पंचायत सिंगारपुर के आश्रित ग्राम सुकतरा और तुमरादहा नवागांव में आदिवासी बहुल्य बस्ती है, जहाँ पर प्रति दिन अवैध तरिके से कच्ची शराब बनाकर बेचा जा रहा है। वह मध्यप्रदेश से आकर छत्तीसगढ में बस्ती बनाकर अपना अवैध शराब का व्यपार चला रहा है ।
शराब पीने के लिये मंदिरा प्रेमीयो का दिन भर जमावडा लगा रहता है और लगातार शराबियो की भारी मात्रा में मोटर सायकल और वाहन चलने से
शहर जैसा वाहन चलने लगता है|

शाम ढलते ही जंगल बन जाती है शहरी गलियाँ-
क्योकि शाम होते ही जंगल के बीच तुमरादहा नवागांव बस्ती बसी है ।
जहां बहुत सी संख्या में मोटर सायकल की रैली की तरह शराबियो कि भीड़ देखने को मिलती है । जैसे कि सरकारी शराब दुकान में भीड नहीं लगती। उनसे ज्यादा यह जंगल बीच यहा गांव में भीड लगती है। दाम बढा कर भी 120 से 150 तक कच्ची शराब बेच रहा है । वह बैगा आदिवासी का फायदा उठाते हुये ।
खुद तो बिगड रहे है और क्षेत्र के लोगो को शराब के लत में जकड लिये है ।
स्कूली बच्चे और महिलाए भी शराब के लत में आ रही हैं । इसी तरह पहाडी मानपुर सडक किनारे बस्ती और नीम पेड के आसपास शाम ढलते ही शराबियो का भारी भीड लगी रहती है । ग्राम दरबानटोला के चिरौजी बस्ती है जो बैगा आदिवासी की है यह भी अवैध शराब की बिक्रिरी का कारोबार सबसे अधिक है ।
क्षेत्रीय पुलिस विभाग हो जानकारी होने के बाद भी नजर अंदाज कर देते है ।
समझसे परे है । पुलिस विभाग अवैध शराब बिक्रिय करने वाले को पकडने में नाकाम है ।

रिपोर्ट-हितेश मानिकपुरी/हरदीप छाबड़ा

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