दलित हत्याकांड में न्यायाधीश ने तीन पुत्रों समेत 6 को 87 हजार का अर्थदंड और उम्रकैद की सुनाई सजा

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सुलतानपुर (ब्यूरो) – दलित की हत्या के मामले में आरोपी पिता व तीन पुत्रों समेत छ: को न्यायाधीश जमाल मसूद अब्बासी ने दोषी ठहराया है। सभी आरोपियों को उम्र कैद एवं कुल 87 हजार रुपए अर्थ दंड की सजा सुनाई गई है।

मामला जयसिंहपुर थानाक्षेत्र के सरतेजपुर गांव का है। जहां के रहने वाले जगदीश प्रसाद वर्मा ने गांव के ही दलित संतराम को धान काटने के लिए कहा था, जिस पर उसने इंकार कर दिया। आरोप के मुताबिक यह बात जगदीश प्रसाद को नगंवार गुजरी और इसी रंजिश को लेकर जगदीश प्रसाद ने 15 दिसंबर वर्ष 2000 को अपने पुत्रगण राधेश्याम वर्मा, ताड़कनाथ, दीनानाथ व सहयोगी राजेश प्रजापति एवं राम संवारे वर्मा के साथ मिलकर लाठी-डंडों से संतराम की पिटाई कर दी।

इस दौरान बीच-बचाव में आए संतराम के पिता मग्घू भाई जयश्री व पत्नी को भी चोटें आई। हमले में गम्भीर रूप से घायल संतराम की अगले दिन इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट की अदालत में विचारण चल रहा था। जिस पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अपने साक्ष्यों एवं तर्कों को पेश किया।

वहीं अभियोजन अधिकारी आरके मिश्रा ने 13 गवाहों को अदालत में परीक्षित कराया। तत्पश्चात न्यायाधीश जमाल मसूद अब्बासी ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद एवं साढ़े 14-14 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदण्ड की धनराशि का 80 प्रतिशत मृतक की पत्नी मनभवता को दिये जाने का आदेश पारित किया है।
रिपोर्ट- दीपक मिश्र
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