बदहाल स्थिति में देशभक्त प्रतिमायें, अशोक स्तंभ का हो रहा अपमान?

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आरा/भोजपुर(ब्यूरो)- आरा में देश के राष्ट्रीय प्रतीक हो या पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा, महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा हो या सुभाष चंद्रबोस की प्रतिमा! ये सभी उदासीनता का दंश झेलने पर मजबूर है| रमना रोड के पास समाहरणालय और कचहरी के बीच है देशरत्न संविधान निर्माता डॉ भीम राव अम्बेडकर की प्रतिमा, संविधान के निर्माण ने डॉ अम्बेडकर को देशरत्न बना दिया या यूँ कहें कि उनके कद को इतना बढ़ा दिया की सभी उनकी मुरीद हो गए तो क्या प्रसिद्धि के बाद हमारे स्मृति चिह्न और राष्ट्र गौरव के प्रतीक इन महापुरुषों से कद में छोटे हो गए जो इनके पैरों तले ही राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह “अशोक स्तंभ” बना दिया गया|

दुख की बात तो यह है कि इस अबेडकर की प्रतिमा का अनावरण 1992 में  उस समय के तत्कालीन प्रांतीय अध्यक्ष अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी संघ, बिहार, पटना मैकू राम(IAS) द्वारा किया गया था और मुख्य अतिथि के रूप में भोजपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी विश्वनाथ प्रसाद चौधरी थे, लेकिन दो-दो IAS की उपस्थिति के बाद भी इतनी बड़ी अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण कहा जाए या फिर सोची-समझी चाल?

अब आइये शहर के चँदवा मोड़ के पास स्थित मूर्ति के पास, यहाँ भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री स्व. बाबू जगजीवन राम और उनकी पत्नी की प्रतिमा है| चँदवा ही जगजीवन बाबु का पैतृक गांव है| चँदवा मोड़ स्थित इस प्रतिमा के बने हुए 5 साल हो गए इस महान व्यक्ति की प्रतिमा भी अनावरण को मोहताज है| जगजीवन बाबु की पुत्री मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष भी रही लेकिन इसके बावजूद इस प्रतिमा का अनावरण दो बार महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा होना तय हुआ लेकिन अब तक नही हो पाया| बाबू जगजीवन राम की पुण्यतिथि हो या जयंती समारोह सभी कार्यक्रमो में भारत सहित अन्य राज्यो के राजनेता शिरकत करते है लेकिन आज भी प्रतिमा का अनावरण नही हो सका है|

रिपोर्ट- रामा शंकर प्रसाद 

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