एशिया में भारत बना रहा चीन पर बढ़त, चीन पर भारी पड़ रहे भारत के कूटनीतिक और रणनीतिक दांव…

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Modi
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत एक बार फिर एशिया में अपनी खोई हुई साख को वापस प्राप्त करने में कामयाब हो रहा है, वहीं चीन को इस मामले में भारत से कड़ी टक्कर मिल रही है और कहीं ना कहीं भारत चीन को पीछे छोड़ रहा है | इसके पीछे पिछले कुछ समय में भारत सरकार द्वारा उठाये गए कूटनीतिक कदम हैं और साथ ही चीन की किसी भी देश के शीर्ष नेतृत्व से संबंध बनाने की नीति से भी भारत को काफी फायदा मिला है |

नेपाल और श्री लंका के मामले में भारत को चीन की इसी नीति का सबसे अधिक फायदा हुआ है, नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार के दौरान चीन पूरी तरह से देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर झुकता चला गया और ओली भी चीन को लुभाने के लिए भारत के नेपाल भरोसेमंद साथी भारत के खिलाफ चले चलने लगे और मधेसी आन्दोलन से हुए नुकसान की सारी जिम्मेदारी भारत पर डाल दी, लेकिन अब नेपाल में पुष्प कमल दहल सत्ता पर काबिज हो चुके हैं, जिससे की भारत की पकड़ अनेपाल पर मजबूत हो गयी है |

इसी तरह श्री लंका में भी महिंद्रा राजपक्षे के कार्यकाल के दौरान श्रीलंका चीन के पक्ष में था पर अब सता बदलने और पीएम मोदी के श्री लंका दौरे के बाद से स्थिति बदल गयी है और दोनों देशों के संबंधों में मजबूती आई है |

मालदीव सरकार ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को सत्ता से बेदखल करने के साथ उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया है। लेकिन हाल में मोहम्मद नशीद की वापसी सत्तारूढ़ अब्दुल्ला यामीन की सरकार के लिए चिंता की तरफ इशारा करती हैं। बता दें कि 2012 में जब नशीद को अचानक सत्ता से हटाया गया था तब यह भारत के लिए एक अच्छी खबर नहीं थी क्योंकि इससे भारत मालदीव के साथ राजनीतिक संबंधों में बैकफुट पर चला गया था। जिसने चीन को इस छोटे द्वीपीय देश में आगे बढ़ने का मौका दे दिया था।

नशीद ने अपनी राजनीतिक जीवन में आयी हलचल के बाद ब्रिटेन से वापास श्रीलंका आने का फैसला लिया और राजनीति में बढ़त बनने के लिए कुछ नए कदम भी उठाए हैं। जिसमें भारत ने नशीद का समर्थन किया और अब इससे यामीन के ऊपर दबाब बनेगा और भारत को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

अब मालदीव में भी भारत के लिए जमीन तैयार होती दिख रही है, और भारत बेसब्री से मालदीव में चुनाव का इंतज़ार कर रहा है |

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