दुनिया की सबसे तेज और ताकतवर मिसाइल से लैस भारतीय नौसेना का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत है आईएनएस कोलकाता

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दिल्ली- भारतीय वैज्ञानिकों ने वह कर दिखाया जिसके लिए पूरी दुनिया के देशों ने भारत को तकनीक देने और मदद देने से मना कर दिया था | लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम से देश को यह बड़ी सफलता हासिल हो चुकी है और आज भारतीय नेवी दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौ सेनाओं में से एक बन चुकी है |
दरअसल हम बात कर रहे है आईएनएस को कोलकाता की | आईएनएस कोलकाता भारतीय स्वदेशी तकनीक से बना भारत का सबसे बड़ा जंगी जहाज है | इस विध्वंसक को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 16 अगस्त 2014 को भारतीय नेवी को सौंप दिया है | आईएनएस कोलकाता की सबसे बड़ी खासबात यह है कि इस विध्वंसक जहाज को तैयार करने में जिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है वह पूर्णतः स्वदेशी है |
कब रखी गयी थी आईएनएस कोलकाता की नींव-
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईएनएस कोलकाता की नींव वर्ष 2003 में रखी गयी थी | और भारतीय वैज्ञानिकों के लगातार परिश्रम के दम पर भारतीय नौसेना को देश में ही बना अब तक का सबसे बड़ा युद्धक, विध्वंसक जहाज आईएनएस कोलकाता वर्ष 2014 में प्राप्त हो गया है |
आखिर कितना शक्तिशाली है आईएनएस कोलकाता –
आईएनएस कोलकाता भारत का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत है | इस युद्धपोत की लम्बाई 164 मीटर और चौड़ाई तक़रीबन 18 मीटर है | इस युद्धपोत में एक ही टाइम पर नौसेना के 30 अधिकारी और 300 नौ सैनिकों को तैनात किया जा सकता है | इस युद्धपोत की रफ़्तार 30 नॉटिकल मील है |
इसं युद्धपोत को ऊर्जा देने के लिए 4 गैस टर्बाइन जनरेटर और एक डीजल आल्टरनेटर लगा हुआ है | इनसे 4.5 मेगावाट बिजली उत्पन्न होती है कि इनसे एक पूरे के पूरे शहर को रोशन आसानी से किया जा सकता है |
दुनिया की सबसे तेज और शक्तिशाली मिसाइल से भी है लैस –
आईएनएस कोलकाता में दुनिया की सबसे तेज गति से मार करने वाली दुनिया की सबसे बेहतरीन मिसाइल ब्रह्मोस को भी तैनात किया है | ब्रह्मोस मिसाइल को ज्ञात हो कि भारत और रूस ने मिलकर संयुक्त रूप से तैयार किया है | इसके अलावा इस युद्धपोत में भारत और इजरायल के संयुक्त तत्वाधान में तैयार बराक श्रेणी की मिसाइलो को भी तैनात किया गया है |
इसके अलावा इस युद्धपोत में स्वदेश निर्मित 76 एमएम सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) और एके 630 सीआईडब्ल्यूएस हवा और भूमि पर एक साथ मार कर सकने वाली तोपों को भी तैनात किया गया है | साथ ही साथ किसी भी पनडुब्बी को मार गिराने में सक्षम इस युद्धपोत में सभी पनडुब्बी रोधी हथियारों को भी तैनात किया गया है |
यह विमान समुद्र में जंग लड़ने के लिए स्वदेश में किए गए प्रयासों के अनुपम उदाहरण हैं, जिनमें स्वदेश निर्मित रॉकेट लांचर (आईआरएल), स्वदेश निर्मित ट्वीन-ट्यूब टॉरपीडो लांचर (आईटीटीएल) और नई पीढ़ी के एचयूएमएसए सोनार शामिल हैं |
किसी भी रडार को दे सकता है चकमा –
इस युद्धपोत की एक सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यह विशाल युद्धपोत जब तक किसी रडार के बिलकुल नजदीक नहीं पहुँच जाता है तब तक इस युद्धपोत को राडार पर एक छोटी नौका जैसा ही देखा जा सकता है | अपनी इसी विशेष खाशियत की बदौलत यह विध्वंसक युद्धपोत किसी भी देश की सीमा के काफी भीतर तक घुसकर मार कर सकता है और किसी भी बड़े से बड़े शक्तिशाली राष्ट्र को भी घुटने पर आने के लिए मजबूर कर सकता है |
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