अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की शरण में पहुंचे अलगावादी, भारत ने कहा कश्मीर नहीं पाक अधिकृत कश्मीर असली मुद्दा |

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कश्मीर घटी पिछले कुछ दिनों से हिंसा और तानव से जूझ रही है, इसी बीच कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने भारत सरकार के सामने अमन का प्रस्ताव भेजा है |
अलगाव वादी नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय सस्थाओं और राष्ट्र प्रमुखों को संबोधित करते हुए अपने इस पत्र में अमन का प्रस्ताव भेज कर समर्थन माँगा है | अपने पत्र उन्होंने कहा भारत को घटी में शांति कायम करने के लिए इस प्रस्ताव न पालन करना चाहिए
इस प्रस्ताव में अलगाववादियों ने शान्ति वापसी की चार शर्ते रखी हैं :-
भारत सरकार कश्मीर की विवादित स्थिति और यहां के लोगों के आत्मनिर्णय के हक़ की बात माने.
आबादी वाले इलाक़ों से सेना हटाई जाए और ग़लती करने वाले सैनिकों को सुरक्षा देने वाला क़ानून ख़त्म किया जाए.
राजनैतिक क़ैदियों को रिहा किया जाए. नज़रबंदी ख़त्म की जाए और आज़ादी के हक़ में बोलने वालों को राजनीति में जगह दी जाए.
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के लोगों को कश्मीर आने की इजाज़त दी जाए.
भारत सरकार पर दबाव बनाने की अलगाववादियों की इस नाकाम कोशिश का कड़ा जवाब देते हुए भारत सरकार ने कश्मीर मुद्दे पर किसी भी अलगाववादी या किसी भी बाह्य शक्ति से कोई भी बात करने से इनकार कर दिया है |
केद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा “कश्मीर तो कोई मुद्दा ही नहीं है असली समस्या तो पाकिस्तान और चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जे का है |”
कश्मीर मुद्दे पर सभी अलगाववादी एकजुट होकर भारत सरकार पर दबाव बनाने कि कोशिश कर रहे हैं किन्तु सरकार ने इस मसले पर अपना रुख एकदम साफ़ कर दिया है और कहा है यह भारत सरकार का मामला है और किसी को भी इस मसले पर टिप्पणी कि इज़ाज़त नहीं है |

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