अमेरिका से 145 हॉवित्‍जर तोप खरीद रहा है भारत, सब की सब चीनी सीमा पर करेगा तैनात

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दिल्ली- रक्षामंत्री श्री मनोहर परिर्कर की अध्यक्षता में रक्षामंत्रालय ने पिछले काफी समय से पेंडिग चले आ रहे है उस सौदे को पास कर दिया है जिसके बारे में सुनकर चीन के रोंगटे खड़े हो जायेंगे | दरअसल आपको बता दें कि भारतीय रक्षामंत्रालय ने अमेरिका से 145 अल्ट्रा लाईट हॉवित्‍जर तोप की खरीद पर हामी भर दी है | इस पूरे सौदे में भारतीय रक्षामंत्रालय 5000 करोंड रूपये खर्च करेगा |

30 साल बाद भारत खरीदने जा रहा है तोप-
बता दें कि भारत ने आज से 30 साल पहले राजीव गांधी जब देश के प्रधानमंत्री थे तब स्वीडिस कंपनी बोफोर्स से बोफोस हॉवित्‍जर तोप खरीदी थी लेकिन बोफोर्स को लेकर राजीव गांधी सरकार काफी विवादों में घिरी रही और इस मामले पर घोटाले के भी आरोप लगे थे | तभी से भारत ने अब तक कोई भी होवित्जर तोप नहीं खरीदी थी लेकिन 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल वार के बाद से ही भारत में इस बात की आवश्यकता को समझा गया कि यदि हिमालय के ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से दुश्मनों को मार भगाना है और उन पर विजय पाना है तो उन्हें इस तरह की तोपों की आवश्यकता पड़ेगी | इन्ही जरूरतों के मद्देनजर भारत ने अमेरिका से 145 अल्ट्रा लाईट हॉवित्‍जर तोप की खरीद की मंजूरी दी है |

चीन से लगी हुई अरुणांचल और लद्दाख में तैनात करेगी भारतीय सेना –
प्राप्त जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है कि भारतीय सेना अमेरिकी अल्ट्रा लाईट हॉवित्‍जर तोपों को लद्दाख और अरुणांचल से सटी चीनी सीमा पर तैनात करेगा | ऐसा इसीलिए भी क्योंकि चीन अरुणांचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा मानता है और उस अक्सर इस फिराक में रहता है कि वह अरुणांचल प्रदेश को चीन में शामिल कर सके |

ज्यादातर तोपें भारत में ही असेम्बल की जायेंगी –
हॉवित्‍जर बनाने वाली कंपनी बाई सिस्‍टम्‍स भारत में ऑफसेट लगाने के लिए 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगी | वहीं 25 तोपें बिलकुल तैयार अवस्‍था में आएंगी जबकि बाकी को यहां पर असेंबल किया जाएगा | हॉवित्‍जर खरीदने का प्रस्‍ताव 10 साल पहले रखा गया था | वहीं धनुष तोप के निर्माण पर भी डीएससी ने संतुष्टि जताई | इसके तहत तीन तोप 30 जून तक डिलीवर कर दी जाएंगी जबकि तीन और सितम्‍बर अंत तक मिल जाएंगी |

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