भारतीय नौ-सेना ने किया कमाल, मात्र 79 मिनट में पहुँचाया दिल

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भारतीय नौ-सेना का डार्नियर विमान
भारतीय नौ-सेना का डार्नियर विमान

अपनी बहादुरी और चपलता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द भारतीय नौ-सेना ने आज मानवता की भी एक बहुत बड़ी मिशाल साबित की हैं, नौ-सेना ने यह बहादुरी भरा कारनामा कोई युद्ध के मैदान में या फिर दुश्मनों के लिए नहीं बल्कि एक सिविल ब्यक्ति की जान बचाने के लिए किया हैं और इस अभियान के दौरान नौ-सेना ने अपने विमान से एक ब्यक्ति के दिल को तिरुअनंतपुरम से कोच्चि पहुंचा कर किया हैं I भारतीय नौ-सेना के इस बेहतरीन कर्म की वजह से आज एक ब्यक्ति की जान बचा ली गयी हैं I

 

देश के भीतर यह पहला मामला हैं जब भारतीय नौ सेना ने अपने डोर्नियर विमान या फिर किसी सैनिक विमान का प्रयोग किसी भी प्रकार की नागरिक मेडिकल इमरजेंसी के लिए किया गया हो, आपको बता दें कि यह घटना शुक्रवार की हैं जब सुबह तिरुअनंतपुरम के श्री चित्रा तिरुनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में 46 साल के नीलकंद शर्मा को ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया जिसके बाद शर्मा के परिवार ने उनका दिल दान करने का फैसला किया I

और घर वालों के दिल के दान करने के निर्णय लेने के बाद यह निश्चय किया गया कि यह दिल किसको दिया जाएगा तब यह तय हुआ कि यह दिल कोच्चि के लिसी अस्पताल में भर्ती 47 साल के ऑटो ड्राइवर मैथ्यू अचदन को दिया जायेगा I और इसी निर्णय के बाद भारतीय नौ-सेना से बात की गयी और साथ ही साथ पुलिस से भी I अस्पताल प्रशासन और नौ-सेना के अधिकारियों ने बहुत ही सावधानी पूर्वक इस पूरी तैयारी को अंजाम दिया और अंत में तिरुअनंतपुरम के डॉक्टरों ने पांच घंटे के ऑपरेशन के बाद शाम 6.10 मिनट पर शर्मा का दिल निकाल लिया I

अब इस दिल को मात्र 4 घंटों के भीतर ही कोच्चि पहुँचाना था तभी इसे 47 वर्षीय ऑटो ड्राइवर मैथ्यू अचदन के शरीर में लगाया जा सकता हैं और इसीकाम को अंजाम देने के लिए भारतीय नौ-सेना ने अपने विमान को लगा दिया था I

आपको बता दें कि निकाले जाने के ठीक 18 मिनट के बाद दिल तिरुअनंतपुरम के इंडियन एयरफोर्स बेस पर पहुंचा और उसके बाद 6.48 पर डॉर्नियर ने दिल के साथ उड़ान भरी जिसके बाद शाम 7.29 पर यह कोच्चि के एयरफोर्स बेस पर उतर गया और वहां से 7.34 बजे दिल को लेकर एंबुलेंस रवाना हो गई I कोच्चि में तक़रीबन 200 पुलिसवालों की मदद से ट्रैफिक को पहले ही मैनेज किया जा चुका था लिहाजा लिसी अस्पताल के लिए 10 किलोमीटर का सफर सिर्फ 8 मिनट 32 सेकंड्स में तय हो गया. और रात 8 बजे शुरू हुआ ट्रांसप्लांट ऑपरेशन सफल रहा I data input – aajtak

 

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