भारतीय जंगी जहाजों की कतर यात्रा

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भारतीय नौसेना के जहाज दीपक , दिल्ली , तबर और त्रिशूल खाड़ी में एक महीने की तैनाती पर हैं ताकि द्वीपक्षीय संबंध बढ़ाया जा सके और क्षेत्रीय मित्र नौसेना के साथ नौ सैनिक अभ्यास किया जा सके। खाड़ी गए जहाज भारतीय नौसेना के पश्चिमी बेड़े के हिस्से हैं और इनका ठिकाना मुंबई है। चार जहाजों में आईएनएस दिल्ली तथा आईएनएस त्रिशूल ने आज कतर के दोहा में प्रवेश किया और वहां 17 सितंबर , 2015 तक रहेंगे। इस दौरान जहाज सहयोग बढ़ाने के लिए तथा आपदा प्रबंधन और समुद्री आतंकवाद के खतरों से निपटने और समुद्री डकैती रोकने की नौसैन्य कारर्वाईयों में भाग लेंगे। पेशेवर कार्यों के अतिरिक्त खेलों और सामाजिक व्यस्तता कार्यक्रम भी बनाए गए हैं जिनका उद्देश्य नौसेनाओं के बीच सहयोग और समझदारी बढ़ाना है।

भारत की समुद्री परंपरा काफी प्राचीन है और खाड़ी देशों के साथ समुद्री संबंध 4000 वर्ष ईसा पूर्व से है। भारतीय नौसेना की क्षमता बहुपक्षीय है। इसमें विमान वाहक , आधुनिक जहाज , पनडुब्बी , विमान तथा समुद्री कमांडो शामिल हैं। भारतीय नौसेना के ढ़ांचे की एक विशेषता यह है कि इसके बेड़े के अधिकतर जहाज भारत में डिजायन और निर्मित किए गए हैं।

भारतीय नौसेना का खाड़ी देशों के सभी देशों के साथ घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और भारतीय नौसेना अनेक नौसेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यास करती रही है। भारतीय नौसेना को क्षेत्र की अनेक नौसेनाओं के प्रशिक्षण तथा जलमापचित्रण का अवसर प्राप्त है। सोमालिया के तट पर समुद्री दस्युओं से लड़ने में भारतीय नौसेना के जहाजों की भागीदारी से क्षेत्र की नौसेनाओं के साथ द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं।

भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंध परम्परागत रूप से आर्थिक तथा जनता के संपर्क पर केन्द्रित रहे हैं। बढ़ते हुए व्यापारिक संबंध शीघ्र भारत को कतर का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बनाएगा। पिछले दशक में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध में वृद्धि हुई और इससे नवंबर, 2008 में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौता हुआ। भारत-कतर संयुक्त रक्षा सहयोग समिति के गठन से प्रशिक्षण, सामरिक अध्ययन तथा संयुक्त अभ्यास और सूचनाओं को साझा करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय यात्राएं हुई हैं और नौसैनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ है। भारत और कतर हिन्द महासागर नौसैनिक परिसंवाद (आईएनओएस) के सदस्य हैं। यह संगठन हिन्द महासागर क्षेत्र के 35 देशों का स्वैच्छिक एवं सहयोगी संगठन है और इस संगठन ने सूचना आदान-प्रदान तथा समुद्री विषयों पर सहयोग के लिए आदर्श मंच के रूप में सेवा दी है। भारतीय जहाजों की वर्तमान यात्रा भारत की शांतिपूर्ण मौजूदगी तथा खाड़ी देशों में मित्र देशों के साथ एकता और भारत तथा कतर के बीच वर्तमान संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए है।

 

Source _ PIB

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