समुद्र में डकैती से जुड़े उच्च जोखिम क्षेत्र (एचआरए) में संशोधन

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муранское стекло распродажа यूरोपियन यूनियन चेयर ऑफ द कांटेक्ट ग्रुप ऑफ द कोस्ट ऑफ सोमालिया (सीजीपीसीएस) ने 8 अक्टूबर, 2015 को समुद्र में डकैती के मद्देनजर ज्यादा जोखिम वाले इलाके (एचआरए) की सीमा में संशोधन की घोषणा की है। यह संशोधन 1 दिसंबर, 2015 से लागू हो जाएगा। जहाजरानी उद्योग के राउंड टेबल पर एचआरए की नई सीमा पर हुआ यह समझौता स्वागतयोग्य कदम है। इससे समुद्र में भारत की सुरक्षा से जुड़ी कई चिंताएं दूर हो जाएंगी। भारत सरकार (रक्षा मंत्रालय/भारतीय नौसेना, विदेश मंत्रालय, डीजी शिपिंग) ने 2012 से ही कई फोरमों पर अपनी इन सुरक्षा चिंताओं का जिक्र किया है।

план цыганы пушкин पूर्वी अरब सागर में समुद्री डाकुओं का आतंक बढ़ने की वजह से अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी उद्योग ने इसके जोखिम से जुड़े इलाके को जून, 2010 में 78 0ई देशांतर तक बढ़ा दिया था। इस वजह से भारत का पश्चिमी समुद्री तट भी इसके दायरे में ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र के तहत आ गया। पूर्वी तट पर एचआरए को 65 0ई से लेकर 78 0ई से बढ़ाने के बाद व्यापारिक जहाजों पर निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से जुड़ा जोखिम बढ़ गया है क्योंकि ये जहाज ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र में आ जाएंगे। भारतीय समुद्री तट से दूर समुद्र में भारतीय सैन्य जहाजों को लेकर भी यही स्थिति पैदा हो जाएगी।

исламский сонник черви सरकार की ओर से समुद्री डाकुओं के खिलाफ अभियान के तहत अदन की खाड़ी में अक्टूबर, 2008 से भारतीय नौसेना के पोतों की तैनाती के अलावा भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने 120 समुद्री डाकुओं को उनके चार जहाजों से गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां जनवरी से मार्च, 2011 के बीच हुईं। समुद्र में भारतीय नौसेना के बढ़ते अभियान और निगरानी की वजह से पूर्वी अरब सागर में डकैतियों में काफी कमी हुई है। आखिरी बार 12 मार्च को समुद्री डाकुओं से जुड़ी गतिविधि की खबर मिली है। भारतीय समुद्री क्षेत्र और इससे लगे समुद्री इलाके में डकैती की घटना न होने, सुरक्षा चिंताओं और एचआरए के विस्तार की वजह से भारत एचआरए की समीक्षा चाह रहा है। इसमें कई देशों का समर्थन हासिल है।

http://dexter.ru/priority/statya-382-nk.html статья 382 нк हालांकि इस मामले में 2012 से ही बहस चल रही है लेकिन भारत के निर्देश पर यूरोपीय यूनियन की अध्यक्षता में 14 अक्टूबर (दुबई) और 15 मार्च(ब्रसेल्स) को तदर्थ बैठक हुई ताकि इस समस्या को सुलझाया जा सके। 15 जून को शेयर्ड अवेयरनेस एंड डिकन्फिल्कशन (एसएचएडीई) की बैठक में भारतीय नौसेना ने खतरे का आकलन पेश किया। एसएचएडीई इस क्षेत्र में सैन्य प्रयासों के समन्वय का मंच है। इसके बाद 15 जुलाई को एसएचएडीई की 18वीं बैठक में एचआरए पर चर्चा ही केंद्र में रही। इसमें कई देशों ने भारत के रुख का समर्थन किया। जहाजरानी उद्योग ने 15 अक्टूबर को एचआरए की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में इसके प्रति प्रतिबद्धता जताई।

2016 एचआरए में संशोधन से समुद्र में भारतीय नौसेना की कुछ चिंताएं जैसे – जहाज पर मौजूद सेना और सैन्य साजोसामान और निजी सुरक्षा बलों जैसे मुद्दे सुलझ सकेंगे। इसके अलावा भारतीय जहाज मालिकों को इंश्योरेंस और संबंधित परिचालन लागत में भी बचत होगी।

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