भारतीय सेना का एक ऐसा अफसर जिसने पाकिस्तान के कर डालें दो टुकडें ! और बन गया देश का सबसे बड़ा जनरल !

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भारत की दो महान विभूतियाँ राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ साथ-साथ

सैम मानेकशॉ एक ऐसा नाम था जिसके नाम से ही पूरी की पूरी पाकिस्तानी फौज और अफसरों के दांत खट्टे हो जाते थे I सैम मानेकशॉ का पूरा नाम ‘सैम होर्मूसजी फ़्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ’ था I इसी बहादुर अफसर के नेत्रत्त्व ने भारत ने द्वतीय विश्वयुद्ध के बाद किसी भी देश के विरूद्ध पूरी दुनिया की सबसे बड़ी जीत और पूरी दुनिया में द्वतीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैनिक आत्मसमर्पण करवाया था I

अक्सर भारत का पडोसी देश पाकिस्तान भारत के ऊपर हमले की धमकी देता है, युद्ध की धमकी देता है और इतना ही नहीं पाकिस्तान ने अब तक भारत के ऊपर 1 नहीं 2 नहीं बल्कि 4-4 बार हमले भी किये I लेकिन पाकिस्तान को कभी भी भारत के विरूद्ध युद्ध में सफलता हाथ नहीं लगी I

पाकिस्तान ने भारत के ऊपर पहला हमला आज़ादी के तुरंत बाद 1947-1948 में आज़ादी के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर राज्य को हथियानें के लिए किया I लेकिन भारतीय सैनिकों के जोश के सामने उसे मुंह की खानी पड़ी I उसके बाद पाकिस्तान ने भारत के ऊपर दूसरा हमला 1962 में भारत की चीन के हाथों पराजय के बाद 1965 में जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की म्रत्यु के बाद देश के शासन की बागडोर लालबहादुर शास्त्री के कंधो पर आई तब किया और उसमें भी पाकिस्तान को भारत के हाथों एक बार फिर से शिकस्त का सामना करना पड़ा I भारतीय सैनिकों के हाथों 2 बार युद्ध में पराजय झेल चुके पाकिस्तान ने तीसरी बार भारत के ऊपर तब आक्रमण किया जब भारत पाकिस्तानी सेना के द्वारा पूर्वी पाकिस्तान आज के वर्तमान बांग्लादेश की स्वतंत्रता का समर्थन किया जा रहा तब किया I

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तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के साथ हाथ मिलाते हुए सैम मानेकशॉ

जिस समय वर्ष 1971 में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया उस समय देश की सेना की बागडोर कई युद्धों का अनुभव प्राप्त कर चुके देश के सबसे बहादुर जनरल ‘सैम होर्मूसजी फ़्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ’ के हाथों में था I सैम के हाथों इस बार पाकिस्तान ने इतनी बड़ी पराजय का सामना किया कि जिसका वर्णन शब्दों में कर पाना ही असंभव हो जाता है I

1971 में पाकिस्तान ने भारत को चारो तरफ से घेरने के चक्कर में पूर्वी और पश्चिमी आज के बांग्लादेश और वर्तमान पाकिस्तान दोनों फ्रंट पर युद्ध छेड़ दिया लेकिन सैम मानेकशॉ के नेत्रत्त्व ने भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को ऐसी धूल चटायी कि पाकिस्तानी सेना के पैर उखड गए और दुनिया के इतिहास में पाकिस्तान को द्वतीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा I

1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के पूर्वी क्षेत्र के कमांडर जनरल ए.ए.के. नियाजी को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा और इतना ही नहीं नियाजी के साथ पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भी भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था I पाकिस्तानी जनरल नियाजी और पाकिस्तान के इस आत्मसमर्पण का गवाह बना था उस समय बांग्लादेश का रेस कोर्स का प्रसिद्द मैदान I

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