भारतीय सेना का जाबाज जिसने अकेले ही बदल दी 1965 में भारत-पाक युद्ध की शक्ल, खेमकरण की भूमि को बना दिया पाकिस्तानी टैंकों की कब्रगाह

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परम वीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद

1965 के भारत पाक युद्ध के 50 वर्ष पूरे हो चुकें है पूरा देश उस विजय की कामयाबी में डूबा हुआ है I 1965 की विजय के जश्न की अगर बात करें तो इस युद्ध की याद और जीत का जश्न तब तक अधूरा रहता है जब तक देश के सबसे बड़े योद्धा वीर अब्दुल हमीद की बात न की जाय I

1965 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के पास अमेरिका से भीख में मिले हुए दुनिया में अजेय कहे जाने वाले पैटन टैंक और अत्यधुनिक हथियार थे और उसी की दम पर पाकिस्तान के विदेशमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान को गलतफहमी हो गयी कि वह भारत को हरा कर जम्मू और कश्मीर राज्य को भारत से छीन लेंगे I

अपनी इसी महत्त्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए सितम्बर 1965 के महीने में पाकिस्तान ने भारत के ऊपर पैटन टैंकों से लैस सेना और अत्याधुनिक हथियार और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन के साथ अतिउत्साह में भारत के ऊपर भयंकर हमला बोल दिया I हालाँकि पाकिस्तान ने इससे पहले गुजरात के रन ऑफ़ कक्ष में मई के महीने में ही इन्ही अजेय समझे जाने वाले टैंकों से हमला कर चुका था I लेकिन अतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान को अपनी सेनाओं को वापस लेना पड़ा था I

अब एक बार फिर से पाकिस्तान ने सितम्बर के महीने में अखनूर के रास्ते से अमृतसर पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से भारत पर हमला बोल दिया था I ऐसे में भारतीय सेना के जवानों ने खेमकरण में पाकिस्तानी सेना के अजेय कहे जाने वाले अमेरिकी पैटन टैंकों का मुकाबला करने के उद्देश्य से जवाबी कार्यवाही की I

लेकिन एक तरफ अजेय अमेरिकी टैंक तो दूसरी तरफ मात्र संगीन लिए हुए जवान कैसे और कब तक पाकिस्तान के इन आतंकियों का मुकाबला कर पाते I भारतीय सेना को रौंदते हुए यह पाकिस्तानी टैंक आगे ही बढ़ते हुए चले आ रहे थे इनका उद्देश्य था जल्द से जल्द अमृतसर पर कब्ज़ा करना और भारत को युद्ध में पराजित करना I

और तभी पाकिस्तानी सेना के सामने एक चट्टान की तरह से आकर खड़ा हो गया था एक भारतीय, कम्पनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद I जिसके फौलादी इरादे और कुछ कर गुजरने की हिम्मत के सामने दुश्मन सेना के पैर उखड गए और उन्हें वापस पाकिस्तान की तरफ भागना पड़ा I

हवलदार अब्दुल हमीद कैसे बन गए पहले महावीर और फिर परमवीर अब्दुल हमीद –

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परम वीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के सम्मान में भारत सरकार द्वारा जारी किया गया डाक टिकट

घटना है 8 सितंबर 1965 की जब पाकिस्तान ने तक़रीबन आधी रात के समय अमृतसर को कब्जे में लेने के लिए पंजाब के खेमकरण के रास्ते से आगे बढ़ना शुरू कर दिया था I पाकिस्तान के इस नापाक हमले को विफल करने के लिए भारतीय सेना को भेज दिया गया I कम्पनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद उसी सेना की टुकड़ी की अग्रिम मोर्चे पर खड़े सैनिक थे I जिस समय पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया था उस समय पाकिस्तान के पास अमेरिका से मिले हुए पैटन टैंक थे जिन्हें जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि युद्ध में अजेय समझा जाता था I और उनके सामने भारत के जवानों के पास था तो केवल एल.एम.जी. गन, “थ्री नॉट थ्री रायफल” I हवलदार वीर अब्दुल हमीद के पास “गन माउनटेड जीप” थी जो पैटन टैंकों के सामने मात्र एक खिलौने के सामान थी इससे बढ़कर वह और कुछ भी नहीं I

जल्द ही पाकिस्तानी सेना पैटन टैंकों की बदौलत भारतीय सेना को रौदंते हुए आगे बढ़ने लगी ऐसा देख अब्दुल हमीद की आँखों में खून उतर आया और देश के इस सबसे बहादुर बेटे ने तुरंत ही अपनी “गन माउनटेड जीप” पर बैठ दुश्मनों के अजेय समझे जाने वाले पैटन टैंकों पर निशाना साधना शुरू कर दिया I

अपने सटीक निशाने और सूझ-बूझ की बदौलत इस वीर हिदुस्तानी सिपाही ने अमेरिकी पैटन टैंकों के कमजोर हिस्से को तो पहले खोजने का प्रयास किया और मिल जाने पर वहीँ पर अपनी “गन माउनटेड जीप” के गोले को दाग दिया I देखते ही देखते एक के बाद दूसरा टैंक धरासायी होने लगा और अब्दुल हमीद को ऐसा करते देख भारतीय सैनिकों का मनोबल आकाश को चूमने लगा और फिर क्या था खेमकरण के असल उत्तर नामक उस स्थान पर भारतीय सेना के जाबाजों के पाकिस्तान को असल उत्तर देना शुरू कर दिया I

वीर अब्दुल हमीद ने अपने सटीक निशाने और सूझ बूझ के साथ पाकिस्तान के साथ अपराजित समझे जाने वाले पैटन टैंको को धरासायी कर दिया और खेमकरण का वह युद्ध का मैदान पाकिस्तानी टैंकों का कब्रगाह बन गया था I इस वीर सैनिक की बहादुरी को देख पाकिस्तानी सेना में भगदड़ मच गयी और उसी भागती हुई सेना का पीछा करते समय एक गोला इस वीर की जीप पर आकर गिर गया और धरती माँ का सबसे प्यारा और होनहार बेटा बुरी तरह से घायल हो गया I लेकिन घायल होने से पहले ही अब्दुल हमीद की बहादुरी ने इस युद्ध में भारत को विजय दिलवाई और साथ ही खेमकरण की भूमि को पाकिस्तानी सेना की कब्रगाह भी बना दिया I

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परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की पत्नी को सम्मानित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (इस समय मोदी प्रधानमंत्री नहीं बल्कि उम्मीदवार थे)

खेमकरण में अमेरिकी पैटन टैंकों की यह दुर्दशा देख अमेरिकी सेना और अधिकारियों ने एक बार फिर से इस पैटन टैंक की समीक्षा की थी, क्योंकि अमेरिकी और पाकिस्तानियों को इस बात का भरोसा ही नहीं हो रहा था कि एक “गन माउनटेड जीप” से पैटन टैंक नष्ट किये जा सकते है I लेकिन अफ़सोस अमेरिकियों ने अभी भी सिर्फ और सिर्फ उस “गन माउनटेड जीप” को देखा था उसे चलाने वाले उस महावीर हिन्दुस्तानी अब्दुल हमीद के फौलादी इरादों को नहीं I

घायल होने के बाद वीर अब्दुल हमीद ने 9 सितंबर को इस देश को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया और जाते-जाते छोड़ गए अपनी एक ऐसी वीर गाथा जिसको सुनने के बाद आज भी करोड़ों हिन्दुस्तानियों का सर विनम्रता से झुक ही जाता है I

अब्दुल हमीद की म्रत्यु के और उस युद्ध के समाप्त होने के मात्र सप्ताह भर से कम समय के भीतर ही उन्हें परमवीर चक्र से नवाजे जाने की घोषणा की गयी I

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