भारत के अभिप्रेत राष्‍ट्रीय तौर पर निर्धारित योगदान: एक नज़र

0
291

indc
भारत ने अपने अभिप्रेत राष्‍ट्रीय तौर पर निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) जलवायु परिवर्तन संबंधी संयुक्‍त राष्‍ट्र फ्रेमवर्क कन्‍वेंशन को प्रस्‍तुत कर दिए हैं। आईएनडीसी की कुछ खास बातें निम्‍नलिखित हैं:-

1. परम्‍पराओं और संरक्षण तथा संतुलन के मूल्‍यों पर आधारित स्‍वस्‍थ और सतत जीवन-शैली का प्रतिपादन तथा प्रसार करना।

2. आर्थिक विकास के समनुरूपी स्‍तर पर अन्‍य देशों द्वारा अब तक अनुसरण किए गए मार्ग पर चलने के स्‍थान पर एक जलवायु अनुकूल और स्‍वच्‍छतर मार्ग अपनाना।

3. इसकी सकल घरेलू उत्‍पाद उत्‍सर्जनों की तीव्रता को वर्ष 2005 के स्‍तरों की तुलना में वर्ष 2030 तक 33-35 प्रतिशत तक कम करना।

4. प्रौद्योगिकी के हस्‍तांतरण और हरित जलवायु निधि (जीसीएफ) सहित कम लागत के अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍त की सहायता से वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्‍म ईंधन पर आधारित ऊर्जा संसाधनों से लगभग 40 प्रतिशत संचित विद्युत संस्‍थापित क्षमता प्राप्‍त करना।

5. वर्ष 2030 तक अतिरिक्‍त वन और वृक्ष आवरण के माध्‍यम से 2.5-3 बिलियन टन CO2 के समतुल्‍य अतिरिक्‍त कार्बन ह्रास सृजित करना।

6. जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि, जल संसाधन, हिमालयी क्षेत्र, तटीय क्षेत्र, स्‍वास्‍थ्‍य और आपदा प्रबंधन में विकास कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाकर जलवायु परिवर्तन के प्रति बेहतर रूप से अनुकूलन करना।

7. अपेक्षित संसाधन और संसाधन अंतर के आलोक में उपरोक्‍त उपशमन और अनुकूलन कार्रवाइयां करने के लिए घरेलू धनराशि और विकसित देशों से नई तथा अतिरिक्‍त्‍निधि जुटाना।

8. क्षमता निर्माण करना, भारत में उत्‍कृष्‍ट जलवायु प्रौद्योगिकी के शीघ्र प्रसार और ऐसी भावी प्रौद्योगिकियों के लिए संयुक्‍त सहयोगात्‍मक अनुसंधान एवं विकास के लिए घरेलू ढांचा तथा अंतर्राष्‍ट्रीय वास्‍तुशिल्‍प का सृजन करना।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here