विस्फोटक सामग्री ढ़ोने वाले बिना पंजीयन दौड़ रहे वाहन, आरटीआई से मांगी गयी जानकारी से जिला प्रशासन में मचा हड़कम्प

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सोनभद्र(ब्यूरो)- बीते दिनों विधानसभा भवन के अंदर विस्फोटक से जुड़े सफेद पाउडर मिलने से हड़कंप मच गया और सरकार ने इसकी जांच कई बड़ी एजेंसियों से कराने में लगी । अभी तक जांच पूरी भी नहीं हो पायी है कि यह पाउडर है क्या और यह पाउडर की विस्फोटक क्षमता क्या है और इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विधान सभा के अंदर पहुंचने से सुरक्षा कर्मियों से चूक हुयी या फिर यह किसी साजिस का हिस्सा तो नहीं है । जिसका कोई खुलासा अभी हुआ भी नहीं कि सोनभद्र के खनन क्षेत्रों में विस्फोटक सप्लाई देने वाले वाहनों को लेकर परिवहन विभाग द्वारा आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी के बाद पूरे प्रशासनिक अमले में भूचाल ला दिया है ।

इस बावत परिवहन विभाग को विस्फोटक वाहनों को लेकर कोई जानकारी नहीं है । वही सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिस अधीक्षक को भी इस विस्फोटक वाहनों को लेकर कोई बेसिक जानकारी तक नहीं होना बताया जा रहा है ।
बताते चलें कि सोनभद्र में बड़े पैमाने पर पत्थर खनन कार्य किया जाता है और इसमें बड़े पैमाने पर विस्फोटक का प्रयोग किया जाता है । जिसकी सप्लाई विस्फोटक सप्लायर द्वारा विस्फोटक वाहनों द्वारा की जाती है ।सड़क पर बेखौफ और बिना रोकटोक के फर्राटा भरती यह कोई साधारण पिकप वैन नहीं है । बल्कि यह विस्फोटक लेकर चलने वाली वैन है । इस वाहन के बॉडी पर भले ही सुरक्षा को लेकर खतरा लिख दिया गया हो मगर विभाग को इसके खतरे की घंटी शायद आज तक नहीं सुनाई दी । जिसका खुलासा परिवहन विभाग द्वारा आरटीआई के माध्यम से दी गयी जानकारी से मिला है ।

आरटीआई कार्यकर्ता हरिओम पांडेय ने परिवहन विभाग से एक जानकारी मांगी थी क्या सोनभद्र में सड़क से विस्फोटक परिवहन करने वाले वाहनों का पंजीयन है। इस सवाल के जवाब में परिवहन विभाग का चौंकाने वाला जवाब आरटीआई कार्यकर्ता को मिली उसमें उन्होंने सड़क मार्ग से विस्फोटक परिवहन करने वाले वाहनों की संख्या शून्य बताई । उसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता हरिओम पांडे ने एक और जानकारी पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संस्थान नागपुर सिमाला जिस के क्रम में उनकी संस्था आगरा द्वारा बताया गया कि सड़क द्वारा विस्फोटक परिवहन में लगे वाहनों का पंजीयन आरटीओ यानी परिवहन विभाग में होना अनिवार्य है ।

जहां एक तरफ विधानसभा में सफेद पाउडर मिलने से पूरे सरकारी तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है वहीं और सरकार ने इसकी जांच के लिए कई एजेंसियों को जिम्मेदारी दी हुई है सुरक्षा को लेकर उठे सवाल पर सरकार भी बेहद चिंतित है कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद यह पाउडर अंदर आया कैसे हालांकि जांच एजेंसी जांच कर अपनी रिपोर्ट बाद में सौंपेगी। मगर योगी सरकार में सरकारी तंत्र इस तरह काम कर रहा है और कितनी गंभीर है इसकी बानगी सोनभद्र में देखा जा सकता है ।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक जनपद में विस्फोटक परिवहन में लगे वैन की जानकारी विभाग को नहीं है और न विस्फोटक परिवहन के नाम से किसी वाहनों का विभाग में कोई रजिस्ट्रेशन यानी पंजीयन है । आलम यह है कि विभाग को यह तक पता नहीं कि सोनभद्र में विस्फोटक लेकर कितनी और कौन-कौन सी गाड़ियां चल रही है। विभाग के पास यहां तक जानकारी नहीं है कि जिस पिकप वैन का वह रजिस्ट्रेशन कर रहा है वह वाहन बाद में इसका उपयोग किस मद में कर रहा है । आखिर सवाल यह उठता है कि कमर्शियल वाहनों का समय- समय पर परिवहन विभाग में फिटनेस चेकिंग कराया जाता है। बावजूद इसके वर्षों से चल रहे विस्फोटक वाहनों को लेकर विभाग को जानकारी क्यों नहीं हुई । क्या बिना गाड़ी देखे ही फिटनेस कर दिया जाता है । यह सवाल विभाग को अब चुभने लगा है ।

जब आरटीआई के हवाले से मिली जानकारी के बाद मीडिया ने परिवहन विभाग के अधिकारी अरुण कुमार राय से सवाल पूछा तो अधिकारी की बोलती बंद हो गई और वे अपने विभाग के कर्मचारी से जानकारी लेना शुरू कर दिया । वही इस पूरे मामले को लेकर जब सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस अधीक्षक आर पी0 सिंह से पूछा गया तो उनका कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और यदि ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। यानी इतने गंभीर मसले पर पुलिस अधीक्षक ने भी अपना सरकारी बयान ही देकर कन्नी काट लिया गया ।

बहरहाल विस्फोटक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सोनभद्र प्रशासन ही नहीं विस्फोटक विभाग भी कितना गम्भीर है इसका अंदाजा इस बात से सहज लगाया जा सकता है कि विस्फोटक सुरक्षा से जुड़े अधिकारी वाराणसी से आगरा तक इस मामले में कैमरे पर बोलने से मना कर दिया । अब सवाल यह उठता है कि यदि भविष्य में कभी कोई बड़ा हादसा होता है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा । तब कौन कौन लोग कार्रवाई के जद में आयेंगे ,जिसका जवाब किसी के पास नहीं है ।

रिपोर्ट- ज़मीर अंसारी

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