हरसिमरत कौर बादल : फ़ूड इंडस्ट्री को इंस्पेक्टर राज से बड़ा खतरा, ‘मेक इन इंडिया’ भी प्रभावित

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मैन्युफैक्चरिंग या ऐग्रिकल्चर के मुकाबले फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ ज्यादा है, लेकिन ‘इंस्पेक्टर राज’ के कारण इस इंडस्ट्री की जॉब और आमदनी पैदा करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। मै यह भी मानती हूँ कि देश के फूड रेग्युलेटर फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के सामने कई तरह की दिक्कतें हैं।

harsimrat kaur

मंत्री के मुताबिक नियमों में कुछ बदलावों की सख्त ज़रूरत है ‘इंस्पेक्टर राज’ को खत्म कर ‘रजिस्ट्रेशन राज’ लाया जाना चाहिए।अगर कंपनियों को सही माहौल और नियमों के पालन के सेल्फ सर्टिफिकेशन की इजाजत मिले, तो भारत में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों को फायदा होगा।

इंडिया के बारे में नेगेटिव फीडबैक के कारण कंपनियां दूसरे देशों में निवेश कर रही हैं, मौजूदा माहौल में कोई यह नहीं कह सकता है कि मंजूरी कब मिलेगी। जिस वजह से प्रॉजेक्ट्स इंडिया में नहीं आ रहे हैं,’कंपनियों को अपनी साख पर चोट लगने का डर है।
फ़ूड प्रोसेसिंग के नियम बिल्कुल साफ होने चाहिए और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियम न मानने वालों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे दूसरों को सबक मिले।, ‘अगर हम वाकई मेक इन इंडिया को सफल बनाना चाहते हैं, तो हमें ऐसे इंटरनैशनल स्टैंडर्ड्स अपनाने होंगे, जो प्रॉडक्ट अप्रूवल पर नहीं, बल्कि उन्हें तैयार करने में काम आने वाली चीजों के अप्रूवल पर आधारित हों।इस मुद्दे पर मुझे पीएम और हेल्थ मिनिस्टर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
हमारा मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए सेफ और हेल्दी फूड सुनिश्चित करने का है, लेकिन इसके नाम पर हैरसमेंट नहीं होना चाहिए। सिस्टम पारदर्शी होना चाहिए, हमारे पास टेस्टिंग के प्रोटोकॉल्स नहीं है हर लैब का अपना तरीका है। मैन्युफैक्चरर्स को पता ही नहीं है कि जांच कैसे होगी।’
‘इस इंडस्ट्री को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। स्टैंडर्ड्स बनाए रखे जाने चाहिए अगर कोई नॉन-हाइजीनिक या जहरीला फूड उपभोक्ताओं को देगा, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा |

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