हैदाराबाद का भारत में विलय

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सरदार वल्लभभाई पटेल को झुककर नमस्कार करता हुआ निजाम
सरदार वल्लभभाई पटेल को झुककर नमस्कार करता हुआ निजाम

जिस समय अंग्रेज भारत छोड़ कर जा रहे थे, उस समय हमारा देश भारत 562 टुकड़ों में बंटा हुआ था I लेकिन जब 1947 में भारत आजाद हुआ था उस दिन तक देश के सभी रजवाड़े भारतीय संघ में सम्मिलित हो चुके थे सिवाय 3 (हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर) को छोड़कर I

जिस समय भारत आज़ाद हो रहा था उस समय इन 562 टुकड़ों में बटे हुए देश को इक्कठा करने के लिए एक साथ लाकर एक भारतीय संघ की स्थापना करने के लिए सरकार में एक रियासती मंत्रालय का निर्माण किया गया और सरदार वल्लभभाई पटेल को इसका मंत्री नियुक्त किया गया I ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि पूरे देश के सभी नेताओं को यह बात बहुत ही अच्छी तरह से पता थी कि इस काम को सरदार के अतिरिक्त कोई और नहीं कर सकता I

रियासती मंत्रालय का निर्माण करने के बाद सरदार को उसका कार्यभार सौपने के बाद एक दिन हँसते हुए वायसराय गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटेंन ने सरदार से कहा कि, “सरदार, ! इस वृक्ष पर 562 फल एप्पल लगे हुए है ! इनमे से आप कितने अपने पास लेंगे ?

सरदार पटेल को माउंटबेटेंन की इस बात को समझने में बिलकुल भी देर न लगी, उन्होंने बहुत गंभीरता से जवाब दिया, “सभी”

माउंटबेटेंन ने कहा, “किसी और के लिए एक भी नहीं”

सरदार ने कहा, “संभावना तो इसी बात की है कि एक भी नहीं, लेकिन फिर भी देखेंगे !

और क्या हुआ उसके बाद वह सर्वविदित है, सरदार ने जो कहा था वह कर दिखाया और पूरे के पूरे 562 फलों को तोड़कर अपनी झोली यानिकी सभी 562 देशी रियासतों को मिलाकर एक भारतीय संघ की स्थापना कर दी I आज उसी भारतीय संघ को भारतीय गणराज्य कहा जाता है I

 ऑपरेशन पोलो और हैदराबाद का भारत में विलय –

भारत की आज़ादी के समय सभी 562 रियासतों को यह बता दिया गया था कि आप को क्या करना है देख लीजिये भारत या फिर पाकिस्तान किसी न किसी के साथ आप सभी को भी विलय करना ही पड़ेगा I जैसा कि हम ऊपर ही बता चुके हैं सभी मिल गए सिवाय तीन को छोड़कर हैदरबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर I

हैदरबाद को सरदार पटेल ने कई बार आग्रहपूर्वक कहा कि वह भारत के साथ सम्मिलित हो जाय लेकिन वैसा नहीं हो रहा था I इसके कारण थे क्योंकि जिस समय भारत पर अंग्रेजों का आधिपत्य था उस समय भी हैदराबाद की अपनी सेना, रेल सेवा और डाक तार विभाग हुआ करता था I साथ ही उस समय आबादी और कुल राष्ट्रीय उत्पाद की दृष्टि से हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा राजघराना था I हैदरबाद का क्षेत्रफल 82,698 वर्ग मील था जो कि इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कुल क्षेत्रफल से भी अधिक था I

लेकिन हैदराबाद की कुल आबादी में 80% हिंदू लोग थे जबकि सत्ता और सेना आदि महत्त्वपूर्ण पदों पर मुसलमान ही राज करते थे I वहां पर सीधे तौर पर हिन्दुओं की अनदेखी की जाती थी उनके साथ भेदभाव होता था I

ऑपरेशन पोलो के तहत हैदरबाद में घुसते सेना के ट्रक
ऑपरेशन पोलो के तहत हैदरबाद में घुसते सेना के ट्रक

और इतना ही नहीं हैदराबाद की सबसे बड़ी समस्या थी कासिम रिजवी जिसके नेतृत्व में हैदराबाद में रजाकारों की एक बड़ी फौज खड़ी हो चुकी थी I कासिम रिज़वी हैदाराबाद के निजाम का बहुत ही ख़ास था I और यह सभी हैदरबाद की आज़ादी के समर्थन में जन सभाएं कर रहे थे और उस इलाक़े से गुज़रने वाली ट्रेनों को रोक कर न सिर्फ़ ग़ैर-मुस्लिम यात्रियों पर हमले कर रहे थे बल्कि हैदराबाद से सटे हुए भारतीय इलाक़ों में रहने वाले लोगों को भी परेशान कर रहे थे I हिन्दुओं के साथ मारपीट, महिलाओं के साथ बलात्कार आदि इनके रोज के खेल का हिस्सा बन चुका था I

निजाम की जिन्ना से गुहार –

निजाम ने जब देखा कि अब उसका आज़ाद मुल्क का सपना सरदार तोड़ ही डालेंगे तो उसने अपनी मदद के लिए मोहम्मद अली जिन्ना से अपनी मदद के लिए गुहार लगायी I निजाम ने भारत से युद्ध करने की मंशा प्रकट करते हुए जिन्ना से कहा था कि अगर वह भारत से युद्ध करे तो क्या पाकिस्तान उसकी मदद करेगा ? (के एम मुंशी, एंड ऑफ़ एन एरा)

लेकिन इसका जो जवाब जिन्ना ने निजाम को दिया था उस जवाब को कुलदीप नैय्यर ने अपनी आत्मकथा बियॉंन्ड द लाइंस में लिखा है कि जिन्ना ने इसका इसका जवाब देते हुए कहा था कि, “वो मुट्ठी भर आभिजात्य वर्ग के लोगों के लिए पूरे पाकिस्तान के अस्तित्व को ख़तरे में नहीं डाल सकते हैं I

और इधर भारत में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू माउंटबेटन की उस सलाह को गंभीरता से लेने के पक्ष में थे कि इस पूरे मसले का हल शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए जिसके लिए हमें अगर “यूनाइटेड नेशन” में भी जाना पड़े तो हम चले जायेंगे I

लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल जवाहरलाल नेहरु के इस आकलन से बिलकुल भी सहमत नहीं थे उन्होंने कहा भी था कि हैदराबाद “भारत के पेट में कैंसर के समान है” जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है I

सरदार पटेल को इस बात की पूरी जानकारी थी कि हैदराबाद पूरी तरह से पाकिस्तान के कहने में चल रहा है I यहां तक कि उन्हें इस बात की भी जानकारी थी पाकिस्तान पुर्तगाल के साथ हैदराबाद का समझौता कराने की फ़िराक़ में है जिसके तहत हैदराबाद गोवा में बंदरगाह बनवाएगा और ज़रूरत पड़ने पर वह उसका इस्तेमाल भी करेगा I और इतना ही नहीं हैदराबाद के निज़ाम अपने एक संवैधानिक सलाहकार सर वाल्टर मॉन्कटॉन के ज़रिए लॉर्ड माउंटबेटन से सीधे संपर्क में थे I मॉन्कटॉन के कंज़र्वेटिव पार्टी से भी नज़दीकी संबंध थे I और हद तो तब हो गयी जब माउंटबेटन ने उन्हें सलाह दी कि हैदराबाद को कम से कम संवैधानिक सभा में तो अपना प्रतिनिधि भेजना चाहिए तो मॉन्कटॉन ने जवाब दिया था कि अगर वह ज़्यादा दवाब डालेंगे तो वे पाकिस्तान के साथ विलय के बारे में बहुत गंभीरता से सोचने लगेंगे I

 भारत से युद्ध के लिए हैदरबाद को अपनी सेना के लिए हथियारों की खरीद –

इतना ही नहीं हैदरबाद ने करांची में अपने एक राजदूत को भी नियुक्त कर दिया था और तो और निजाम ने राष्ट्रमंडल का सदस्य बनने की भी इच्छा प्रकट की थी जिसे उस समय के ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली और उनकी सरकार ने ठुकरा दिया था I निज़ाम भारत के खिलाफ जरूरत पड़ने पर युद्ध की पूरी तैयारी कर रहा था I इस बात का खुलासा निजाम के सेनाध्यक्ष मेजर जनरल एल एदरूस ने अपनी किताब हैदराबाद ऑफ़ द सेवेन लोव्स में लिखा है कि निज़ाम ने उन्हें ख़ुद हथियार ख़रीदने यूरोप भेजा था I लेकिन वह अपने इस मिशन में सफल नहीं हो पाए थे क्योंकि हैदराबाद को एक आज़ाद देश के रूप में मान्यता नहीं मिली थी I

लेकिन इस बात का खुलासा उस पहले ही हो चुका था और भारत सरकार तथा सरदार पटेल को इस बात की जानकारी भी हो चुकी थी क्योंकि जिस समय मेजर जनरल एल एदरूस यूरोप में हथियार खरीदने के लिए गए थे उस समय ही एक दिन उनकी मुलाकात लंदन में डॉर्सटर होटल की लॉबी में माउंटबेटेन टहलते हुए हो गयी थी जहाँ पर वह अचानक से ही से माउंटबेटेन टकरा गए I

माउंटबेटन ने जब उनसे पूछा कि वह वहाँ क्या कर रहे हैं तो उन्होंने झेंपते हुए जवाब दिया था कि वह वहाँ अपनी आंखों का इलाज कराने आए हैं I माउंटबेटन ने मुस्कराते हुए उन्हें आँख मारी I लेकिन इस बीच लंदन में निज़ाम के एजेंट जनरल मीर नवाज़ जंग ने एक ऑस्ट्रेलियाई हथियार विक्रेता सिडनी कॉटन को हैदराबाद को हथियारों की सप्लाई करने के लिए राज़ी कर लिया I

और तब जैसे ही भारत को इस बारे में पता चला कि सिडनी कॉटन के जहाज़ निज़ाम के लिए हथियार ला रहे हैं तो उसने इन उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया I एक समय जब निज़ाम को लगा कि भारत हैदराबाद के विलय के लिए दृढ़संकल्प है तो उन्होंने ये पेशकश भी की कि हैदराबाद को एक स्वायत्त राज्य रखते हुए विदेशी मामलों, रक्षा और संचार की ज़िम्मेदारी भारत को सौंप दी जाए I

रज़ाकारों का क़हर और सरदार पटेल का हैदरबाद में सेना भेजना –

कासिम रिज़वी जो कि निजाम का सबसे नजदीकी था उसकी पार्टी के और निजाम के तथाकथित समर्थक जिन्हें रजाकार कहा जाता था उन्होंने हैदरबाद में निर्दोष हिन्दू जनता के ऊपर हमला करना शुरू कर दिया, आये दिन हिन्दू महिलाओं के साथ रेप और हत्या की खबरें आने लगी जिससे सरदार पटेल अत्यधिक दुखी हो रहे थे और उनका क्रोध और बढ़ता ही जा रहा था I एक दिन तो हद ही हो गयी जब रजाकारों ने 22 मई के दिन गंगापुर रेलवे स्टेशन पर जा रही एक ट्रेन पर हमला बोल दिया और भयंकर तबाही मचायी I सरदार को जब इस बात का पता चला तो उनके सब्र का बाँध पूरी तरह से टूट चुका था I उसके बाद उन्होंने जो किया उस के बारे में भारत के पूर्व उपसेनाध्यक्ष जनरल एस.के.सिन्हा अपनी आत्मकथा “स्ट्रेट फ्रॉम द हार्ट” में लिखते हैं कि, “मैं उस समय जनरल करियप्पा के साथ कश्मीर में था कि तभी उन्हें संदेश मिला कि सरदार पटेल उनसे तुरंत मिलना चाहते हैं I दिल्ली पहुंचने पर हम पालम हवाई अड्डे से सीधे सरदार पटेल के घर पर गए I मैं बरामदे में रुक गया जबकि करियप्पा उनसे मिलने के लिए अंदर गए और मात्र पाँच मिनट में ही बाहर आ गए I बाद में उन्होंने मुझे बताया कि सरदार ने उनसे सीधा सवाल पूछा जिसका उन्होंने एक शब्द में जवाब दिया I”

बाएं से...जवाहरलाल नेहरू राजगोपालाचारी और सरदार पटेल
बाएं से…जवाहरलाल नेहरू राजगोपालाचारी और सरदार पटेल

सरदार ने उनसे पूछा कि, “अगर हैदराबाद के मसले पर पाकिस्तान की तरफ़ से कोई सैनिक प्रतिक्रिया आती है तो क्या वह बिना किसी अतिरिक्त मदद के उन हालात से निपट पाएंगे?”

करियप्पा ने इसका एक शब्द का जवाब दिया “हाँ” और इसके बाद बैठक ख़त्म हो गई I

इसी मुलकात के बाद सरदार पटेल ने हैदराबाद के ख़िलाफ़ सैनिक कार्रवाई को अंतिम रूप दे दिया I ज्ञात हो की भारत के तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल रॉबर्ट राय बुचर इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ थे I उनका कहना था कि पाकिस्तान की सेना इसके जवाब में अहमदाबाद या बंबई पर बम गिरा सकती है, हवाई हमले कर सकती है I

इसके जवाब ने सरदार पटेल जनरल बुचर से बस एक ही सवाल किया, उन्होंने बुचर से पूछा कि, “बुचर, हिटलर ने ऐसी बम वर्षा ब्रिटेन के ऊपर लगातार कितने दिनों तक की है ?” सरदार ने इतना कहा कि बुचर खिसिया गया I

उसने सरमाते हुए सरदार को धीरे से जवाब दिया कि तीन चार सालों तक I

सरदार ने फिर कहा कि, “जब ब्रिटिश जनता इतने बड़े हमले को लगतार तीन चार साल तक झेल सकती है तो भारत की जनता थोड़े दिनों क्यों नहीं बर्दास्त कर पाएगी I उन्होंने आगे कहा कि हमारे लोग भी बर्दास्त कर लेंगे I”

 12 सितंबर को आधीरात को सेना हमले के लिए तैयार हो चुकी थी तभी पाकिस्तान से खबर आयी कि जिन्ना की मृत्यु हो चुकी है I उस समय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री विधानचंद्र राय ने सरदार को फोन कर उसी समय पूछा कि, “क्या हमें भी अपना राष्ट्रध्वज झुकाना हैं?”

सरदार ने गरजकर कहा कि, “किसलिए ?” क्या वह आपका कोई रिश्तेदार है ?”

हैदराबाद पर हमले की पूरी तैयारी जब हो रही थी तभी निजाम ने व्यक्तिगत तौर पर गवर्नर जनरल राजगोपालाचारी से अनुरोध किया कि वे ऐसा न करें I और इस पर ऐसा न करने से रोकने के लिए राजा जी और नेहरू की बैठक भी हुई और दोनों ने इस कार्यवाही को रोकने का फ़ैसला किया I और साथ ही निज़ाम के पत्र का जवाब देने के लिए रक्षा सचिव एचएम पटेल और वीपी मेनन की बैठक भी बुलाई गई I

इस बात कि जानकारी दुर्गा दास अपनी पुस्तक इंडिया फ़्रॉम कर्ज़न टू नेहरू एंड आफ़्टर में लिखते हैं कि, “जब पत्र के उत्तर का मसौदा तैयार हुआ तभी सरदार पटेल ने घोषणा की कि भारतीय सेना हैदराबाद में घुस चुकी है और इसे रोकने के लिए अब कुछ नहीं किया जा सकता I”

 भारतीय सेना का हैदराबाद में प्रवेश और निज़ाम की सेना के पैर उखड़ना शुरू

13 सितम्बर को तडके भारतीय सेना ने हैदरबाद के ऊपर तीन तरफ से हमला बोल दिया था I इस हमले को सेना ने नाम दिया था “ऑपरेशन पोलो” क्योंकि उस समय दुनिया में सबसे अधिक 17 पोलो के मैदान हैदरबाद में ही थे I निजाम के सनिकों ने पहले ही दिन से भारतीय फौज के सामने घुटने टेकने युद्ध के मैदान से भागना शुरू कर दिया था I और 17 सितम्बर की शाम तक निजाम ने भारतीय फौज के सामने हथियार डाल दिए और सरनागति स्वीकार कर ली I इस कार्यवाही में 1373 रज़ाकार मारे गए I हैदराबाद स्टेट के 807 जवान भी इस युद्ध में मारे गए लेकिन भारतीय सेना ने अपने भी 66 जवान इस युद्ध में खो दिए थे और 97 जवान सेना के घायल हुए थे I

ऑपरेशन पोलो को समाप्त होना और सरदार का मंत्रीमंडल के सामने भाषण –

ऑपरेशन पोलो समाप्त हो गया एयर निजाम ने शरणागति ले ली है इस बात की जानकारी जब सरदार ने मंत्रीमंडल को दी, तब उन्होंने बहुत गर्व के साथ कहा था कि, “निजाम समाप्त हो गया है I भारत के सीने का कैंसर हमने मिटा दिया है और निजाम का वंश भी यहाँ समाप्त हो गया है I

इस तरह से अखंड भारत के शिल्पी ने निजाम शाही को समाप्त कर हैदरबाद को भारत का एक अभिन्न अंग बना दिया I

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