ISRO के सबसे बड़े वाणिज्यिक मिशन की तैयारियां पूरी, 10 जुलाई को होगा 5 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण

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इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी-सी28, 10 जुलाई को रात लगभग 9:58 मिनट पर अंतरिक्ष के लिए रवाना होगा, जिसके लिए आज सुबह 7:28 बजे 62.5 घंटे का काउंटडाउन शुरू हो गया |

इन पांचों उपग्रहों का कुल वजन लगभग 1440 किलोग्राम है. इसरो के अनुसार, यह अभियान एंट्रिक्स/इसरो का अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक अभियान होगा. पीएसएलवी-सी 28 अपनी 13वीं उड़ान के तहत ब्रिटेन के सरे सेटेलाइट टेक्नोलॉजी लिमिटेड द्वारा निर्मित पृथ्वी के खास क्षेत्र पर नजर रखने वाले तीन एक तरह के डीएमसी 3 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा. ऐसे उपग्रह धरती से निर्देश देने पर किसी खास क्षेत्र की तस्वीरें लेने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इन उपग्रहों में प्रत्येक का वजन 447 किलोग्राम है. इन्हें 647 किलोमीटर दूर सन सिनक्रोनस ऑर्बिट यानी सूर्य तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा |

इसके अलावा ब्रिटेन के ही दो और उपग्रह हैं. एक माइक्रो सेटेलाइट सीबीएनटी-1 है जिसे एसएसटीएल ने ही बनाया है. यह पृथ्वी पर नजर रखने वाले अत्यंत छोटे सेटेलाइट की तकनीक प्रदर्शित करने के लिए है. इसके अलावा सरे अंतरिक्ष केंद्र द्वारा ही अत्यंत सूक्ष्म नैनो सेटेलाइट की तकनीक प्रदर्शित करने के लिए डिऑर्बिटसेल नाम का उपग्रह भेजा जा रहा है. डीएमसी 3 उपग्रहों में प्रत्येक की ऊंचाई करीब तीन मीटर है. इतने वजन के साथ पीएसएलवी का प्रक्षेपण एक चुनौती है |

इन उपग्रहों को लांचर पर चढ़ाने के लिए इसरो ने दो खास तरह के एडॉप्टर तैयार किए हैं. डीएमसी इंटरनेशनल इमेजिंग (डीएमसीआइआइ) और एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लि. के बीच हुए करार के तहत इन उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जा रहा है. डीएमसीआइआइ एसएसटीएल की पूर्ण स्वामित्ववाली कंपनी है. डीएमसी 3 समूह में डीएमसी 3-1, डीएमसी 3-2 और डीएमसी 3-3 तीन उन्नत किस्म के लघु उपग्रह हैं |

इनका निर्माण इस तरह से किया गया है कि इससे धरती के किसी हिस्से की जल्द से जल्द बेहतरीन गुणवत्ता वाली तस्वीर प्राप्त हो सके. ये सेटेलाइट धरती के किसी भी हिस्से की तस्वीर हर दिन ले सकते हैं. इनका उपयोग मुख्य रूप से धरती के संसाधनों व पर्यावरण सर्वेक्षण, शहरी सुविधाओं का प्रबंधन और आपदा पर नजर रखने के लिए किया जाना है. सीबीएनटी-1 का वजन 91 किलोग्राम है. डिआर्बिटसैल उपग्रह का वजन मात्र 7 किलोग्राम है. भारत वाणिज्यिक प्रक्षेपण करने वाला चौथा प्रमुख देश है |

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