ISRO ने लांच किया स्वदेशी स्पेश शटल

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हैदराबाद- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ISRO ने अंतरिक्ष की दुनिया में भारत को एक और बड़ी कामयाबी दिलाते हुए इतिहास रच दिया है | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने इस बार पूर्णतः स्वदेशी स्पेस शटल का सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया है | इस स्पेस शटल की सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि यह पूर्णतः स्वदेश में निर्मित है और पुनः प्रयोग में लाया जाने वाला है |

इसरो ने अंतरिक्ष जगत में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए आज सोमवार को आँध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से यह पुनः प्रयोग में लाया जा सकने वाला स्पेस शटल लांच कर दिया है | इस स्पेस शटल के लांच होते ही भारत भी अमेरिका, इजरायल, रूस और जापान तथा फ़्रांस के मजबूत क्लब का हिस्सा बन गया है | चीन ने अभी तक इस मामले में शुरुआत भी नहीं की है |

अब स्पेस मिशन का खर्चा 10 तक कम हो जाएगा –
भारतीय इंजीनियरों का दावा है कि इस स्पेस शटल के सफल परीक्षण के बाद स्पेस मिशन का खर्चा तकरीबन 10 गुना या फिर इससे भी अधिक कम हो सकेगा | भारतीय इंजीनियरों ने दावा किया है कि स्पेस शटल को पुनः प्रयोग में लाने की तकनीक से स्पेस में भेजे जाने वाले पेलोड की कीमत तकरीबन 2000 डालर/किलो (1.32 लाख/किलो) तक कम हो जायेगी | हालाँकि इसरो ने कहा है कि अभी जो हमनें परीक्षण किया है वो स्पेस शटल अपने वास्तविक स्वरुप से 6 गुना छोटा है | जिस वास्तविक स्वरूप को भारतीय वैज्ञानिक बनाना चाहते है उसे बनाने में अभी भी कम से कम 10-15 साल लग जायेंगे |

70 किमी ऊपर जाएगा शटल
क्ररुङ्क-ञ्जष्ठ की ये हाइपरसोनिक टेस्ट फ्लाइट होगी। शटल की लॉन्चिंग रॉकेट की तरह वर्टिकली होगी | इसकी स्पीड 5 मैक (साउंड से 5 गुना ज्यादा) होगी | शटल को स्पेस में 70 किमी ऊपर ले जाया जाएगा | शटल को कक्षा में स्थापित करने के बाद लॉन्च व्हीकल 180 डिग्री मुड़कर बंगाल की खाड़ी में लैंड करेगा | वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल हमनें जो डिजाइन तैयार किया है वो पानी में तैयार नहीं सकता है इसीलिए पानी में उतरते ही इसमें ब्लास्ट हो जाएगा और यह जलसमाधि ले लेगा | लेकिन हमारा मिशन पूरा हो जायेगा आने वाले समय में हम जो स्पेस शटल भेजेंगे वे बहुत आसानी के साथ धरती पर पुनः वापस आ जायेंगे |

अमेरिकी व्हीकल्स से सबसे ज्यादा बार भेजे गए शटल
अभी तक स्पेस शटल भेजने वाले देश अमेरिका के लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल करते रहे हैं | इन व्हीकल्स का कुल 135 बार इस्तेमाल हुआ है और 2011 में रिटायर कर दिया गया |

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