‘जब शहर हमारा सोता है‘ का मंचन रंगमंच के कलाकार एवं साहित्यकार हुए सम्मानित

बलिया(ब्यूरो)- 12 अगस्त 1942 में बलिया में हुए जन क्रांति की 75वीं जयंती के अवसर पर जागरूक शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान, तिखमपुर बलिया द्वारा बापू भवन टाउन हाल में समीर के निर्देशन में नाटक ‘जब शहर हमारा सोता है‘ का मंचन किया गया। संस्थान के सचिव अभय सिंह कुशवाहा ने बताया कि संस्थान का प्रयास है कि बलिया जनपद की गौरवशाली रंगमंचीय परम्परा को युवा पीढ़ी तक कुशलता पूर्वक पहुंचाया जा सकें।

कार्यक्रम का प्रारम्भ कार्यक्रम अध्यक्ष डा. जनार्दन राय, संस्थान के संरक्षक प्रो. रामसुंदर राय, डा. राजेन्द्र भारती, डा. इफ्तेखार खां द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया। इस अवसर पर साहित्यिक क्षेत्र से डा.शत्रुध्न पाण्डेय, शशि प्रेमदेव, रंगमंच के क्षेत्र से डा.भोला प्रसाद आग्नेय एवं वाराणसी के रंगकर्मी रविकांत मिश्र तथा संगीत क्षेत्र के शालिग्राम जायसवाल एवं जनपद के वरिष्ठ पत्रकार भृगुक्षेत्र के पूर्व सम्पादक अशोक जी को संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया। नाटक दो सम्प्रदायों के माध्यम एक गली पर अधिपत्य के लिए विवाद होता है, इसमें भारत की गंगा-जमुना तहजीब के बीच सम्प्रदायों के मध्य की वैमनस्यता, मानवीय सम्बंधों की विवेचना करता है।

कलाकारों में अभय, आयुष, समीर, सुमन, छोटेलाल, महेन्द्र, अविनाश, मुकेश, अमित, आशुतोष के साथ महिला पात्रों में प्रिया तथा प्रशंसा ने सराहनीय अभिनय किया। संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी विवेकानंद सिंह ने किया। आभार अभय सिंह कुशवाहा ने किया।

अध्यक्षीय सम्बोधन में डा.जनार्दन राय ने नगर के समृद्धशाली रंगमंचीय इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रंगमंच को बचाये रखने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को लगना पड़ेगा, क्योंकि नाटक समाज का आईना होता है, वर्तमान के रंगकर्मी साधुवाद के पात्र है जो वर्तमान में नाटक प्रस्तुत कर रहे है।

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