नगर के वरिष्ठ वयोवृद्ध साहित्यकार के जन्मोत्सव पर आयोजित हुयी काव्य गोष्ठी

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करहल/मैनपुरी(ब्यूरो)- नगर के वरिष्ठ साहित्यकार एव कवि रामदत्त पारस जी के 82 वे जन्मदिवस पर उनके आवास पर काव्य सध्या का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सुरेश चन्द्र मिश्रा ने की। कार्यक्रम का शुभारम्भ कवियो ने मिलकर एक साथ माॅ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।

इस दौरान पारस जी के जन्मद दिवस पर बरनाहल से आये कवि सतीश समर्थ ने अपनी रचना पढते हुये सुनाया कि जब तक कार्य न पूरा हो हे राम नही विश्राम करो। इस दौरान कवि प्रेम चन्द्र प्रेम ने बुजुर्गो के नाम गीता पढा, जिसमे उन्होने सुनाया कि देह थकी मन थका नही है। नन्हे खा ने अनेक छन्दो को सुनाकर सभी को चकित कर दिया और सुनाया कि पाक अभी तक भारत का शौर्य पराक्रम जान न पाये। राजवीर सिंह ने छन्दो को सुनाया और खूब बाह बाही लूटी उन्होने सुनाया कि कर्म भी बढा नही है तेरे बलिदान से। राकेश सरल ने गीत को सुनाते हुये सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया। इस दौरान उन्होने मुझे गुजरे हुये कल का जमाना याद आता है। रामदत्त पारस जी ने श्रगार की रचना सुनाते हुये कहा कि मगर शर्त है कि तुम मुस्कराती रहो।

इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुरेश चन्द्र मिश्रा, प्रभू दयाल, प्रदीप कुमार, राम प्रकास दुवे, दया शंकर, बारे लाल, राम नरेश सहित आदि तमाम सैकडो लोगो ने नगर के वरिष्ठ वयोवृद्ध साहित्यकार रामदत्त पारस जी के जन्मोत्सव की शुभकामनाये देते हुये उनकी दीर्घ आयू की कामना की है।

रिपोर्ट- दीपक शर्मा 

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