झरिया बचाने को लेकर जनता मजदूर संघ ने प्रधानमंत्री पर उठाए सवाल।

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धनबाद/सिंदरी ब्यूरो :  जमसं (कुंती) के पूर्वी झरिया के क्षेत्रीय सचिव (असंगठित) अभिषेक सिंह ने लोको बाजार स्थित आवासिय कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर प्रधानमंत्री से सवाल किया कि झरिया शहर की मौत के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है । सरकार के मास्टर प्लान के अनुसार झरिया शहर के चारों तरफ का इलाका अग्नि और भू धंसान प्रभावित क्षेत्र है। इस कीर्तिमानधारी शहर का न्युनतम 60 प्रतिशत इलाका असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। सम्पुर्ण प्रशासन का ध्यान प्रभावित निवासियों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने पर केंन्द्रित है। इस उथल-पुथल में सिक्के के दूसरे पहलू को जानबुझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, कि आखिर इस शहर की असामयिक मौत के जिम्मेदार कौन कौन हैं और उन्हें चिन्हित कर कितनी कड़ी सजा दी जा सकती है। भुमिगत आग, भू धंसान और खदानों में बाढ की खतरनाक समस्यायों से निबटने हेतु 1919 से ही झरिया कोलफिल्ड के खदानों में हाइड्रोलिक बालू भराई की अनिवार्य शुरुआत की गई थी। 1971 में खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया तथा 1972 से भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, झरिया में खनन का कार्य कर रही है।

 

आजादी के पहले से ही खदानों की सुरक्षा हेतु खान सुरक्षा निदेशालय विभिन्न क्षेत्र में कार्यरत है। फलस्वरुप इन दोनों संगठनों द्वारा नियमों की अवहेलना के वजह से ही इस शहर की स्थिति इतनी भयावह बन गई है। इन परिस्थितियों के लिए जब भी सरकार, भाकोकोलि या खान सुरक्षा निदेशालय को जिम्मेवार ठहराया जाता है तो जवाब यह मिलता है कि इसके लिए राष्ट्रीयकरण से पहले कोयला खनन करने वाले निजी ठेकेदार जिम्मेवार हैं। केन्द्र सरकार द्वारा पारित कोयला खान (संरक्षण तथा विकास) अधिनियम, 1974 ने पुर्व गठित कोल बोर्ड का विघटन किया था तथा उक्त बोर्ड की तमाम संपत्ती, अधिकार आदि का मालिकाना हक केन्द्र सरकार तथा सरकारी कंपनी को प्रदान किया था। 1972 के बाद से नियुक्त प्रत्येक जिम्मेदार पदाधिकारी के आय व संपत्ति की उच्चस्तरिय जांच अगर हो जाए तो सच सामने आ जाएगा।
मौके पर अभिषेक सिंह, ￰खुर्शीद आलम, राजा बॉस, भानु सिंह, हिरामन बाउरी, राजीव सिंह , शंकर प्रसाद, नारायण बाउरी, चन्दन शर्मा, शोएब अंसारी, संगम बाउरी सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।

रिपोर्ट – गणेश कुमार 

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