जानलेवा साबित हो सकता है जर्जर स्कूल भवन

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इलिया/चन्दौली(ब्यूरो)- स्थानीय कस्बा स्थित परिषदीय प्राथमिक विद्यालय प्रथम के भवन जर्जर हो गए हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। चूने और ककैया पत्थर से बनी कई बड़ी दीवारें धराशायी हो चुकी हैं, तो कई अभी भी बड़े हादसे के लिए तैयार हैं। हालांकि प्रशासन का कई बार ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास किया गया। इसके बाद भी अफसरों की नींद नहीं टूटी।

ब्रिटिश हुकूमत में विद्यालय के भवन का निर्माण वर्ष 1919 में हुआ था। इसमें कस्बा के ही नहीं, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी पढ़ने आते थे। धीरे-धीरे भौतिक संसाधन बढ़े और गांव-गांव स्कूलों की स्थापना हुई तो इस विद्यालय से छात्रों की संख्या घट गई। वहीं, देखरेख के अभाव में विद्यालय का यह भवन पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है, जो कभी भी धराशायी होकर किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। वैसे तो बच्चों को बैठने के लिए नए भवन का निर्माण करीब डेढ़ दशक पूर्व हो चुका है और बच्चे उस नए भवन में शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं। इसके बावजूद अभिभावक इस वजह से दहशतजदा हैं कि अधिकांश बच्चे भोजनावकाश के समय इसी जर्जर भवन में खेलने चले जाते हैं और कहीं खेलते समय ही यह इमारत बच्चों को हादसे का शिकार न बना ले। इसके अलावा विद्यालय परिसर में वर्ष 1997 में निर्मित भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। इससे बच्चों के अध्ययन में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। निष्प्रयोज्य घोषित भवनों को ढहाने के लिए विभाग सुधि नहीं ले रहा है। इससे समस्या और गंभीर हो गई है। अंग्रेजी शासन काल में बना विद्यालय भवन वर्ष 2012 के अगस्त माह में विभाग द्वारा जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसके अलावा सांसद निधि से वर्ष 1997-98 में निर्मित भवन अति जीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। इसे भी विभाग ने जर्जर घोषित कर दिया। विडंबना यह है कि इन्हें जर्जर घोषित किए पांच वर्ष बीत गए हैं। पर भवन को गिराने के लिए कदम नहीं उठाया जा सका है। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि जर्जर स्कूल भवन को गिराने की प्रक्रिया ग्राम पंचायत स्तर पर पूरी की जाती है। खंडहर बना विद्यालय भवन अराजक और शरारती तत्वों के लिए पनाहगाह बन गया है। जुआरी और शराबियों की गतिविधियां भी यहां आसानी से देखी जा सकती हैं । हालांकि समीपवर्ती घरों के लोग कई बार ऐसे तत्वों को खदेड़ कर फिर न आने की चेतावनी भी दे चुके हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी प्रकाश चंद्र यादव का कहना है कि कई बार जर्जर विद्यालय भवन को कंडम घोषित कर उसे ढहाए जाने के लिए विभाग को लिखा गया, बावजूद इसके अब तक जर्जर भवन को हटाकर उसका मलबा डिस्पोजल नहीं किया गया है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रक्रिया जल्द शुरू करा दी जाएगी।

रिपोर्ट-ठाकुर मिथिलेश/सद्दाम खान

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