देश के पहले शिक्षामंत्री को लेकर माउन्टबेटेन की भारत के भविष्य के प्रति चिंता …!!

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जिस समय भारत आज़ाद हुआ और नई सरकार का गठन हुआ तो जैसा कि सभी जानते हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की कृपा से देश के पहले प्रधान मंत्री का पद पंडित जवाहर लाल नेहरु को मिला और स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री का कार्य भार सरदार वल्लभ भाई पटेल के मजबूत कंधो को सौपा गया !

सरदार पटेल, माउन्टबेटेन, जवाहरलाल, मौलाना आजाद
सरदार पटेल, माउन्टबेटेन, जवाहरलाल, मौलाना आजाद

नई सरकार को लेकर जवाहर लाल नेहरु थोडा असमंजस में थे वह राजाजी व मौलाना आज़ाद को सौपें जाने वाले विभागों को लेकर सरदार पटेल की राय जानना चाहते थे ! अतः उन्होंने सरदार पटेल से पूछा I

जवाहर लाल नेहरु -: “सरदार, राजा जी को नए मंत्रिमंडल में शामिल करने के बारे में आपकी क्या राय हैं ?”

जवाहर लाल नेहरु के द्वारा पूछे गए इस प्रश्न का अर्थ सरदार तुरंत ही समझ गए क्यों कि वह यह बात जानते थे कि जवाहर लाल राजाजी को मंत्रिमंडल में नहीं लेना चाहते है लेकिन वह यह अपयश अकेले अपने मत्थे नहीं लेना चाहते , इसीलिए उन्होंने यह सोचा कि यह काम सरदार से करवाया जायगा तो सरदार का सम्मान भी बना रहेगा और राजाजी को मंत्रिमंडल में भी नहीं लेना पड़ेगा यही जवाहर लाल की रणनीति थी I लेकिन तभी सरदार ने बड़ी संजीदगी के साथ जवाब दिया !

सरदार पटेल -: “जवाहरलाल ..! राजाजी को जरुर लेना चाहिए नए मंत्रिमंडल में और उन्हें विदेश मंत्रालय सौपना चाहिए I क्योकि विदेश विभाग का उनसे बढ़कर कोई भी जानकर और हमारे पास नहीं हैं I”

जवाहर लाल बिलकुल सन्न रह गए ! क्योकि विदेश विभाग वह स्वयं ही संभाल रहे थे और यह विभाग वह किसी और को देना नहीं चाहते थे I

सरदार पटेल ने आगे कहा -: विदेश मंत्रालय के अलावा अगर उन्हें कोई अन्य कार्यभार सौपा जायेगा तो उनकी सेवा और योग्यता दोनों का दुरुपयोग होगा, इसके बाद सरदार ने जवाहर लाल के चेहरे की तरफ देखते हुए उनके भाव पढ़े और अपना वाक्य पूरा करते हुए कहा पंडित जी मंत्रियों की नियुक्ति का अधिकार आपका हैं ! लेकिन अगर आप राजा जी को विदेश मंत्री के रूप में शामिल करेंगे तो देश को बहुत बड़ा फायदा होगा I”

जवाहर लाल -: एक मिनट तक शांत रहने के बाद बात को मोड़ते हुए दूसरा सवाल पूछा “सरदार ..! मौलाना के बारे में क्या सोचते हैं ? उन्हें कौन सा विभाग देना चाहिए ? मौलाना शिक्षाविद हैं और फिर विद्वान भी हैं I”

सरदार पटेल -: “उनकी विद्वता को लेकर कोई दो राय नहीं हैं I” सरदार ने कहा, “परन्तु उस विद्वता को देखते हुए देश का शिक्षा विभाग तो उन्हें सौपा नहीं जा सकता I”

जवाहर लाल -: “ऐसा आप किस आधार पर कह सकते हैं ?” जवाहर ने पुछा I

सरदार पटेल -: पिछले पाँच सौ सालों के इस्लामिक शासन और उसके बाद के दो सौ सालों के अंग्रजी शासन में हमारी भारतीय शिक्षा एवं भारतीय संस्कृति बिलकुल भुला सी दी गयी हैं I लेकिन अब हमें इसे पुनर्जीवित करना हो तो मौलाना यह काम ठीक से नहीं कर सकेंगे I”

 

इसके बाद जवाहर लाल नेहरु ने जो मंत्रिमंडल की सूची तैयार की, उसमें उन्होंने राजाजी को शामिल नहीं किया और मौलाना को शिक्षा मंत्री बनाया I और उसी सूची को देखकर भारत के अंतिम वाइसराय माउंटबेटेन ने गाँधी जी के साथ उस पर चर्चा करते हुए केवल इतना ही कहा था कि “आपके विचारों को ध्यान में लेते हुए स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री के रूप में मैं मौलाना के चयन को उचित नहीं कह सकता I”

सोर्स – महामानव सरदार लेखक दिनकर जोशी

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