जीवात्म अल्पग्य है, महात्मा मर्मग्य है, परमात्मा सर्वग्य है: पं० सतीश त्रिपाठी

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बांगरमऊ/उन्नाव(ब्यूरो)- जीवात्म अल्पग्य है , महात्मा मर्मग्य है , परमात्मा सर्वग्य है, जब तक जीव किसी महात्मा़ गुरू़ की शरण मे नही जाता तब तक उसे भगवत् प्राप्ति नही होती है|

उक्त विचार न्यू कटरा मे चल रही भागवत कथा मे भागवताचार्य पं० सतीश त्रिपाठी ने व्यक्त किये । उन्होने जडभरत व रहूगण के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया| राजा रहूगण को जड भरत ने भगवान की प्राप्ति मार्ग बताया पूजा पाठ जप तप के साथ महापुरूषो सद्गुरूओ कीकृपा भी आवश्यकहै अजामिल उद्धार एवं भक्त प्रहलाद के प्रसंग मे बताया भगवान भक्त की रच्छा के लिये खम्भे से नरसिंह रूप मे प्रकट होकर अपने भक्त की रच्छा की कथा के यजमान आचार्य सर्वेश शुक्ल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अर्चाना शुक्ल ने ब्यास पूजन कर आरती की कथा मे पुरूषोत्तम बाजपेयी, शिवगोपाल शुक्ल ,बृजेश शुक्ल ,छोटकानी ,धीरेन्द्र शुक्ल, कृष्ण कुमार बाजपेयी, महेश दीक्षित, जयशंकर अवस्थी, बैजनाथ आदि सैकड़ो नर नारी श्रोताओ ने कथा रस पान कि़या बसंजीव शुक्ल व विवेक शुक्ल ने आये हुये कथा प्रेमियो का आभार प्रकट किया।

रिपोर्ट- रघुनाथ प्रसाद

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