चन्द्रशेखर आजाद व बालगंगाधर तिलक की मनी जयंती

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बदायूं(ब्यूरो)- अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की 111वीं और लोकमान्य बालगंगाधर तिलक की 161वीं जयंती प्रखर बाल संस्कारशाला के कैंप कार्यालय पर धूमधाम से मनाई गई। बच्चों ने देशभक्ति गीत और लघुनाटिकाओं की प्रस्तुति दी। बच्चों के देशभक्ति गीत ‘‘मेरा रंग दे बसंती चोला‘‘ ने अनोखा जोश भरा। प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया।

गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने भारतीय क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद और बालगंगाधर तिलक के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे। उन्होंने ब्रिटिश सेना का जमकर मुकाबला किया। मातृभूमि के लिए उनके त्याग और बलिदान से राष्ट्र के युवाओं को नई ऊर्जा मिली और देश की आजादी का नया इतिहास लिखा गया। वही लोकमान्य बालगंगाधर तिलक में बचपन से देशप्रेम की भावन कूट-कूट कर भरी थी। ‘‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है इसे लेकर रहूंगा‘‘ के नारे के साथ अंग्रेजी शासन की क्रूरता का विरोध किया।

अलापुर से आए रघुनाथ सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों को नाकों चने चबा दिए। उनके फौलादी इरादों, हिम्मत और अदम्य साहस से अंग्रेज थर्राते थे। जज के नाम पूंछने पर चंद्रशेखर ने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्र और निवास स्थान जेलखाना बताकर आजादी के मतवाले बन गए।

निर्मल गंगा जन अभियान जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने क्रांतिकारी विचारों ने अंग्रेजी हुकूमत को निशाने पर लिया। ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया। देश के युवाओं में राष्ट्रीय भावना जाग्रत की। महात्मा गांधी ने उन्हें ‘‘आधुनिक भारत का निर्माता‘‘ उपाधि दी थी।

बच्चे ने देशभक्ति गीत, लघुनाटिकाएं प्रस्तुत कीं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत मेरा रंग दे बसंती चोला देशभक्ति गीत ने बच्चों और युवाओं में राष्ट्रप्रेम की ऊर्जा भरी। समाजसेवी सुखपाल शर्मा, रघुनाथ सिंह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद केे चित्र पर पुष्पार्चन कर श्रेष्ठ बच्चों को सम्मानित किया। इस मौके पर रामनिवास शर्मा, रीना शर्मा, आरती शर्मा, पूजा शर्मा, दीप्ति, सौम्या, खुशबू, हेमंत, लव, भूमिका आदि मौजूद रही। संचालन मृत्युंजय शर्मा ने किया।

रिपोर्ट- सोनू यादव

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