छप्पर रखने को लेकर हुए विवाद में जज ने सुनाई पुत्र को 3 साल और पिता को 1 साल की सजा

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सुलतानपुर (ब्यूरो): छप्पर रखने के विवाद को लेकर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में आरोपी पिता-पुत्र को एसीजेएम षष्ठम की अदालत ने दोषसिद्ध ठहराया है। पुत्र को अदालत ने तीन वर्ष के कारावास व अर्थदंड एवं पिता को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

मामला गोसाईगंज थाना क्षेत्र के नटौलीकला गांव का है। जहां के रहने वाले अभियोगी कंगल ने 17 फरवरी 1994 की शाम चार बजे हुई घटना का जिक्र करते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आरोप है कि वह अपनी जमीन पर छप्पर रख रहा था, इसी दौरान आरोपीगण जगेसर, उसके पुत्र आशाराम, रामदास व उसकी पत्नी छोटका मौके पर आकर छप्पर न रखने व हटाने की धमकी देने लगे। जब अभियोगी का भाई मंगल बीच बचाव में आया तो उस पर आरोपियों ने हमलाकर उसका दाहिना हाथ तोड़ दिया और छप्पर भी उजाड़ दिया।

इस मामले का विचारण एसीजेएम षष्ठम की अदालत में चल रहा था। दौरान विचारण आरोपी रामदास व उसकी मां छोटका की मृत्यु हो चुकी है। शेष दो के खिलाफ चल रहे विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने चार गवाहों का परीक्षण कराया। वहीं बचाव पक्ष ने अपने साक्ष्यो को पेश किया।तत्पश्चात न्यायाधीश अनिल कुमार सेठ ने आरोपी आशाराम को भादवि की धारा 323, 504, 325 में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के साधारण कारावास व दो हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं उसके पिता जगेसर को भादवि की धारा 504 में एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा

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