सुप्रीमकोर्ट में ऊँची जाति के जज एससी-एसटी जजों से मुक्ति चाहते है, ऊँचे वर्गों के जजों का है दबदबा -कोलकता हाईकोर्ट के जज ने लगाया SC पर गंभीर आरोप

0
253

justice-karnan

नई दिल्ली- कलकत्ता हाईकोर्ट के जज सीएस कर्णंन ने सुप्रीमकोर्ट के ऊपर ही गंभीर आरोप लगा दिए है | जज सीएस कर्णन ने दलित कार्ड खेलते हुए अपने खिलाफ कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी करने वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ को ही सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है |

कलकत्ता हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज ने सुप्रीमकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लिखे अपने पत्र में कहा है कि ऊँची जातियों से आने वाले जज निचली जाति (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ) से आने वाले जजों से मुक्ति चाहते है | बता दें कि आज़ादी के बाद से देश में किसी जज के द्वारा लगाया गया यह अपने आप में पहला मामला है |

दुनिया को न्याय देने का जिम्मा उठाने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के जज ने पूरी तरह से एक राजनैतिक चाल चलते हुए कहा है कि किसी भी दलित जज के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी करना अनैतिक है और यह अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के खिलाफ भी है | जस्टिस कर्णन का यह भी कहना है कि संविधान पीठ को हाईकोर्ट के कार्यरत जज के खिलाफ स्वता संज्ञान लेते हुए कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी करने का कोई भी अधिकार नहीं है | उन्होंने यह भी कहा कि वह भी तब जब पीठ ने मेरे पक्ष को सुना ही नहीं है |

कौन है जस्टिस कर्णन-
आपको बताते चले कि जस्टिस कर्णन वही जज है जिन्होंने वर्ष 2011 से पूर्व जजों और मौजूदा जजों पर यह आरोप लगाते आ रहे है कि उन्हें मात्र दलित होने के कारण से ही दुसरे ऊँची जाति के जजों के द्वारा प्रताड़ित किया जाता रहा है | बता दें कि उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इस बात का बेहद दुःख है कि उनका जन्म भारत में हुआ है, वह ऐसे किसी देश में जाना चाहते है जहाँ पर जातिवाद बिलकुल भी न हो |

यह भी बताते चले कि सुप्रीमकोर्ट के सब्र का बाँध उस वक्त टूट गया जब जस्टिस कर्णन ने इसी साल जनवरी में पीएम मोदी को एक पत्र लिखकर सुप्रीमकोर्ट के जजों और मद्रास हाईकोर्ट के जजों के ऊपर गंभीर आरोप लगा दिए | बता दें कि जज कर्णन ने मद्रास हाईकोर्ट के जजों और सुप्रीमकोर्ट के जजों के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये थे | इस मामले में जज कर्णन ने एक लिस्ट भी भेजी थी जिसमें उन्होंने मौजूदा और सेवानिवृत्त हो चुके 20 जजों के नामों का भी उल्लेख किया था |

जज कर्णन के इस पत्र के बाद सुप्रीमकोर्ट के सब्र का बाँध टूट गया और कोर्ट ने सीधे 8 फरवरी को जस्टिस कर्णन को नोटिस जारी किया और पूछा कि क्यों न इसे कोर्ट की अवमानना माना जाए| यह भी बता देते है कि इस तरह का नोटिस पाने वाले जस्टिस कर्णन देश की किसी भी हाईकोर्ट के पहले सिटिंग जज है |

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here