कमीशन लेने लूट में छुट दे रही सरकार – दुबे

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राजनांदगांव/छत्तीसगढ़ (ब्यूरो)- छ.ग. प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के महामंत्री एवं जिला कांग्रेस राजनांदगांव के प्रवक्ता रूपेश दुबे ने ई रजिस्ट्री में  स्कैनिंग के नाम पर प्रति पेज 60 से 70 रूपये लिये जाने के निर्णय को जनता से लूट करार दे्रते हुए कहा कि छ.ग. की भाजपा सरकार अपने केन्द्रिय मुखौटा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कथित ड्रीम प्रोजेक्ट को निजी कम्पनियों के हाथों में काम सौंपकर अपने कमीशन वसूली का माध्यम् बनाकर योजना का भट्टा बिठाने का निर्णय लेना करार दिया है।

महामंत्री व प्रवक्ता दुबे ने बताया कि राज्य सरकार जनता को नए – नए प्रावधान लाकर जनता की जेब में डाका डलने वाले कार्य को संरक्षण प्रदान कर रही है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के चलते अब जमीन की खरीदी बिक्री सहित पंजीयन ऑफिस में संपादित होने वाले कार्य के लिए जिस निजी कम्पनी को ठेका दिया गया है। वह कम्पनी जमीन रजिस्ट्री के समय प्रति पेज 60 से 70 रूपए स्केनिंग चार्ज वसूलने का काम कर रही है। जिसके चलते प्रत्येक रजिस्ट्री में न्यूनतम 1000 से 1500 रूपए की  अतिरिक्त राशि का भार जनता को झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही जितने पेज के दस्तावेंज की विभाग में प्रस्तुत किए जाते है। उसके अतिरिक्त 5 से 7 पेज अर्थात् 300 से अधिक की राशि और निजी कम्पनी को उनके कम्प्यूटर में फीड दस्तावेंजों के लिए देने की मजबूरी बन पड़ी है।  पूर्व में मैनुअल आधार पर कार्य होते थे। तो जनता इतनी राशि की मार से बचती थी। लेकिन सरकार मात्र निजी कम्पनी को फायदा पहुंचाने और उनसे कमीशन वसूलने के लिए ऐसा तुगलकी निर्णय लेकर जनता पर बोझ डालने का काम की है।

दुबे ने यह भी बताया कि अब हालात यह है कि स्केनिंग चार्ज बचाने के लिए रजिस्ट्रीकर्ता स्टाम्प वेडरों से स्टाम्प लेने से कतरा रहे है। क्योंकी स्टाम्प वेडरों के पास छोटी – छोटी राशि का स्टॉम्प होता है। ऐसी दशा में उन्हें स्केनिंग चार्ज अधिक देना पडेगा। जिसके कारण स्टॉम्प वेडरों के सामने रोजी रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। निजी कम्पनी के कर्मचारी धारा 32 (क) में फोटों एवं हस्ताक्षर डिजीटल होने के बाद भी स्केनिंग चार्ज वसूलने के लिए मेनुअल लगाने की बाध्यता बना रहे है। साथ ही आधार कार्ड के नंबर से जब काम हो जा रहा है तो उसका भी फोटोकापी लगवाकर उस पेज का भी स्केनिंग चार्ज वसूल रही है। कुल मिलाकर एक निजी कम्पनी को स्टॉप बेचने से लेकर ई-रजिस्ट्री तक फायदा पहुंचाने और उन फायदों के चलते अपना कमीशन तय कर जनता पर सरकार ने डिजीटल इंडिया के नाम पर बोझ डाल दी है । जिससे सरकार के जनहित विरोधी मंशा भी प्रमाणित हुई है। ।
रिपोर्ट-हरदीप छाबड़ा

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