कप्तान साहब जरा इधर भी पधारे, “दर्जनो क्षेत्रो में धधक रही अवैध शराब की भटिठ्या”

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प्रतीकात्मक फोटो

डलमऊ/रायबरेली (ब्यूरो)- सरकार के लाख कोशिशों के बावजूद भी डलमऊ पुलिस सक्रिय होती नही दिख रही है। आलम यह है कि यहॉ पर डलमऊ कोतवाली पुलिस के नाक के नीचे ही दर्जनो क्षेत्रो में अवैध शराब की भट्ठियां धधक रही है। लेकिन डलमऊ पुलिस सब कुछ जानकर भी अनजान बनने का ढोंग कर रही है। सूत्रो की माने तो इस खेल मे पुलिस अपनी भूमिका बखूबी निभाती हैं | क्षेत्र में आबकारी की टीम छापेमारी के लिये आते है तो डलमऊ पुलिस लोगो के माध्यम अवैध रूप शराब बनाने वाले लोगो तक छापेमारी की सूचना बडे आराम से भेज देते है। इसके पचात् छापेमारी के दौरान इन दोनो टीम के हॉथ खाली झूॅझना ही आता है। डलमऊ कोतवाली में सन् 2016 में कुल 68 अवैध कच्ची शराब के मामले दर्ज किये गये जिनमे से आबकारी विभाग टीम की छापेमारी से हुये है। वही एक जनवरी सन् 2017 से लेकर 28 जून सन् 2017 तक कुल दस मामले दर्ज किये गये इससे साफ जाहिर हो रहा है कि डलमऊ पुलिस कितनी सक्रिय है।

इन क्षेत्रो को प्राप्त है कच्ची शराब बनाने का वीआईपी दर्जा-
अवैध कच्ची शराब बनाने में लगभग एक दर्जन से अधिक डलमऊ कोतवाली परिसर से दो से पांच किलो मीटर के अर्न्तगत क्षेत्र आते है। जिनमें से सुरजपुर, भटनीहार, महुवाहार, अवैध रूप से कच्ची शराब बनाने में वीवीआईपी दर्जा प्राप्त किये हुये है। वही वीआईपी क्षेत्र में आने वाले गॉव घोरवारा, जहॉनामऊ, रामपुर, रसूलपुर, हीगांमऊ, हरबतियापुर, नरससवॉ, बलीपुर, बैहराना पूरे पासीन को महारत हासिल है। इन क्षेत्रो में आये दिन लगभग सैकड़ो लीटर कच्ची शराब बनाकर जिले के आस पास क्षेत्रो में छोटे-छोटे शराब तस्करो को मंहगे दामो मे बेच देते है। सर्वाधिक कच्ची शराब घोरवारा में सोमवार और गुरूवार बाजार के दिन तथा बड़े त्योहारो पर काफी तादाद में बनाकर बेची जाती है।

अवैध कच्ची शराब से गई आधा दर्जन जाने-
पुलिस की संरक्षण में अवैध कच्ची शराब का गोरख धंधा बडी तेजी से फलफूल रहा है। यह बात किसी से भी छिपी नही है। लेकिन पुलिस की इसी लापरवाही की वजह से सन् 2016 में लगभग आधा दर्जन से अधिक लोगो ने अपनी जान गवॉ बैठे वही डलमऊ पुलिस जॉच पड़ताल के नाम धन उगाही में लग जाती है। सन् 2016 में ढेलहा मजरे सलेमपुर मे एक व पूरे गुरूबक मजरे खलीलपुर में एक सकुल परिवार के सदस्य की जान गई थी। इसके बावजूद भी डलमऊ पुलिस इन घटनाओ से सबक सीखने को तैयार नही है।

रिपोर्ट- अनुज मौर्य/मोहित

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