कश्मीर में एक बार फिर से कश्मीरी पंडितों पर हो रहे है अत्याचार, घाटी छोड़ने के लिए विवश किया जा रहा है

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जम्मू- कश्मीर में हिंसा और कर्फ्यू का दौर अभी भी जारी है | सरकार ने कश्मीर घाटी के ज्यादातर हिस्सों में अभी भी कर्फ्यू लगाकर रखा हालाँकि सरकारी सूत्रों की मानें तो अब स्थित सरकार के बिलकुल कंट्रोल में है | कश्मीर में हाल ही में हिजबुल कमांडर आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फ़ैल गया था | पाकिस्तानी समर्थित इस विरोध प्रदर्शन में अब तक तक़रीबन 30-35 लोगों के आस-पास लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी तो तक़रीबन 3000 से ज्यादा लोग इस पूरी कवायद में घायल भी हुए है | घायल होने वालों में तक़रीबन आधे पुलिस और अन्य सुरक्षाबल भी है |

1990 के बाद का सबसे बड़ा पलायन बता रहे है –
बीबीसी की वेबसाइट पर छपी खबर के मुताबिक 1990 में कश्मीरी पंडितों के घाटी छोड़ने के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा मौका है जब पंडितों ने घाटी से पलायन किया है | हालाँकि कि सरकारें यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि घाटी से इस बार पंडितों का पलायन हो रहा है | लेकिन घाटी में पिछले कुछ दिनों सरकार विरोधी हरकतें इतनी प्रभावी हो गयी है कि कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर वापस कैम्पों में रहने के लिए विवश हो रहे है |

3,00,000 से ज्यादा पंडितों का हुआ था पलायन –
1990 के दशक में कश्मीर में आतंकी गतिविधिययां अपने चरम पर थी और उस समय घाटी में सबसे ज्यादा अगर किसी को निशाना बनाया जा रहा था तो चुन-चुन कर घाटी में कश्मीरी पंडितों को ही निशाना बनाया जा रहा था | 1990 में आतंकियों के हाथों मारे जाने से बेहतर कश्मीरी पंडितों ने अपने पूर्वजों की जमीन, घर-बार छोड़कर जम्मू सहित अन्य शहरों में वसने की योजना बना ली और वे जैसे तैसे अपना जोकुच वे अपने साथ लेकर जा सकते थे लेकर घाटी से निकल आये और जम्मू सहित देश के अन्य राज्यों में कहीं न कही बसने लगे | ज्यादातर लोग आज भी जम्मू और आस-पास के कैम्पों में अपना जीवन गुजारने के लिए विवश है |

कांग्रेस सरकार ने 5000 भर्तियाँ निकाली थी भर्तियाँ लेकिन केवल 1600 को ही किया भर्ती –
आपको बता दें कि यह काफी दुखद है कि इतने साल बीत गए लेकिन आज तक सरकारें इतना भी नहीं कर सकी कि अपने ही देश में निर्वासितों की जिंदगी जीने वाले कश्मीरी पंडितों, अपने ही घर से निकाले गए इन मजबूर लोगों को वापस इनके ठिकानों, इनके मकानों तक पहुंचाने में नाकाम रही है |

वर्ष 2010 में मनमोहन सिंह सरकार ने घाटी में कश्मीरी पंडितों को पुनः स्थापित करने के लिए 5000 सरकारी नौकरियों की बात कही थी लेकिन जब बात वास्तविकता के धरातल की आई तो इनमें से केवल 1600 को ही सरकारी नौकरी मिल सकी | यह सभी जो नौकरियां लोगों को मिली है वे सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की है | इनमें से भी अब तक 1600 में से 300 वापस घाटी से परेशान होकर तंग आकर पुनः जम्मू के कैम्पों में पहुँच चुके है |

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