अलबेला साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद की 92वीं काव्य गोष्ठी का आयोजन

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बीघापुर-उन्नाव ब्यूरो : अलबेला साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद राग्घुखेड़ा के तत्वावधान में 92वीं काव्य गोष्ठी विश्व देव मंदिर परिसर में राम दत्त रमन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।कमलेश शुक्ल की वाणी वन्दना से गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ।

उसके बाद पूर्व बीआरसी व शिक्षक अनिल वर्मा ने छात्रों के लिए एक प्रेरणादायी गीत पढ़ा- छू लो हर ऊंचाई को अब रहो न तुम बन्धन में,जैसे हरदम पंछी उड़ते हैं उन्मुक्त गगन में।वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र आनंद ने पढ़ा कि प्यासा तन है प्यासा मन है,प्यासा जीवन का प्रतिक्षण है,पर्वत प्यासे नदियाँ प्यासी प्यासा धरती का कण कण है। वहीं संजीव तिवारी ‘पिंटू’ ने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से दूषित पीढ़ी को सचेत करते हुए अवधी रचना पढ़ी कि चेहरा बंधा हवै देहियाँ उघारि भला कोऊ का जानै, अब तो चलि रही पछुआ बयारि भला कोऊ का जानै।

योगेंद्र ने पढ़ा राम रहमान गीता व कुरान का न मान, दादी नानी की कहानी की निशानी खो गयी।अन्य कवियों में राम किशोर वर्मा,अखिलेश शुक्ल आदि ने भी काव्य पाठ किया।

रिपोर्ट – मनोज सिंह

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