लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के सजग प्रहरी कहें जाने वाले अपनी सीमाओं और गरिमाओ का रखे ख्याल

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मुज़फ्फरनगर  (ब्यूरो)- थाना सिविल लाइन के अंतर्गत पुलिस चौकी कच्ची सड़क के पास नशीले पदार्थ को लेकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के सजग प्रहरी कहे जाने वाले खुद ही मौके पर पहुंचकर आरोपियों को पकड़ने का काम भी कर रहे हैं जबकि यह काम सीधे तौर पर पुलिस का है जोखिम उठाना चाहिए लेकिन इतना भी नहीं की अपने पर ही बन आयें पत्रकारिता के भी अपने कुछ तरीके हैं सिद्धांत हैं जिनका पालन हर किसी को करना जरूरी है लेकिन जोश जुनून और अति उत्साह में आकर कुछ प्रहरी भाई अपनी जान को जोखिम में डालकर पुलिस का काम करने लग जाते हैं|

यह किसी भी प्रकार से उचित नहीं है मौके पर पहुंचे ऐसे तथाकथित प्रहरी नशीले पदार्थ बेचने वालों का नशीला पदार्थ अपनी जेबों में भर कर चौकी पर ले आए तथा पुलिस को सोपने लगे क्या जरूरी नहीं था की सूचना पर पुलिस को ले जाया जाता या यह काम पुलिस करती मौके पर सिपाही मावी ने नशीला पदार्थ पत्रकार की जेब से स्वयं निकाला जबकि तथाकथित पत्रकार का कहना था कि उसने यह नशीला पदार्थ बेचने वालों से बरामद किया है|

यह बात किसी भी प्रकार से उचित प्रतीत नहीं होती मान लो पत्रकार के साथ कोई वारदात हो जाए या कोई हमला कर दे तो फिर सीधे तौर पर दोष पुलिस पर ही मंढ दिया जाता है बेहतर हो कि ऐसे मामलों में पुलिस का सहयोग लेकर आगे बढ़ा जाए अन्यथा इस प्रकार की बेवजह की जोखिम भरी पत्रकारिता कभी भी भारी पड़ सकती है|

ज्ञात रहे कुछ समय पूर्व शेरपुर में भी यही घटना घटित हुई थी जिस पर पैसे मांगने के पत्रकारों पर आरोप लगे थे और पत्रकारों के द्वारा 307 में मुकदमा लिखवाया गया था हालांकि कच्ची सड़क चौकी पर एक पत्रकार ने विरोध किया की हमारा काम खबर छापने का है या पुलिस को सूचित करने का लेकिन कुछ पत्रकार अवैध उगाही के चक्कर में चौथे स्तंभ की गरिमा को तार तार करने में लगें हैं बेहतर हो कि अपनी गरिमा और सीमाओं का ध्यान रखते हुए ही अपने मिशन को अंजाम तक पहुंचाया जाए तो यही हमारे हित मे रहेगा।

रिपोर्ट – शहजाद त्यागी

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