कागज में हो जाता स्वच्छ भारत मिशन की खानापूर्ति

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मुरलीछपरा/बलिया (ब्यूरो) -: शासन स्तर पर स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता अभियान जोरों पर चलाया जा रहा है। इसके लिए संबंधितों को आवश्यक दिशा निर्देश के साथ ही साफ सफाई का निर्देश दिया गया है किंतु मुरली छपरा में यह धरातल से काफी दूर है। सफाईकर्मी कागज में इस अभियान के मुख्य हिस्सा है किंतु अपनी ड्यूटी का निर्वहन करना उचित नहीं समझते हैं। गांव की गलियों की बात हो चट्टी चौराहों, बाजार, अस्पताल या विद्यालय आदि सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर देखने को मिल जाएंगे, नाली की सफाई तो दूर की बात है। ग्राम पंचायत सोनबरसा का पूरवा चौबे के दलकी में ग्रामीणों ने सफाई के लिए अनेक बार सफाईकर्मियों से आग्रह किया। संबंधितों को पत्रक दिया किंतु कोई लाभ नहीं हो सका।

अंत में गांव के युवकों ने टोली बनाकर अलग-अलग जिम्मेदारियां ली और अलग-अलग दिन सभी सफाई करते हैं। नाली की सफाई करते हुए सरोज राम व पंडुक कुमार ने बताया कि पहले सफाई के लिए निवेदन हम लोगों ने किया था। जब कोई फायदा नहीं हो हम लोगों ने सफाई का जिम्मा खुद अपने कंधों पर लिया और सफाई नियमित करते रहते हैं। हम लोग तो पहचानते भी नहीं कि कौन सफाईकर्मी हम लोगों के गांव में तैनात हैं क्योंकि वह कभी आता ही नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सफाईकर्मी अपने आप को सबसे बड़े अधिकारी समझते हैं।

वे तो सीधे कहते हैं कि हम लोगों का कोई क्या बिगाड़ सकता है डीपीआरओ साहब है न हमें क्या गम है। कुछ ग्राम प्रधानों की भी पीड़ा यही है जब हाजिरी प्रमाणित करने से मना किया जाता है तो जिले से संबंधित अधिकारी का फोन आता है कि प्रधान जी सारे पंचायत की सफाई की व्यवस्था सफाईकर्मी के ही कंधे पर है। आखिरकार उन लोगों की हाजिरी प्रमाणित करने पड़ते हैं।

रिपोर्ट : विद्याभूषण चौबे

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