किसानों के लिए काल का गाल बनी घाघरा

बलिया (ब्यूरो)- क्षेत्र में घाघरा नदी के तेवर तल्ख होने लगने से लोगों में दहशत का माहौल हो गया है। इब्राहिमाबाद नौबरार से लेकर चांददियर पंचायत तक लगभग पांच किमी की लंबाई में नदी लगातार किसानों की उपजाऊ भूमि निगलती जा रही है।

किसानों के मुताबिक पिछले तीन दिनों में ही घाघरा ने लगभग 60 बीघा जमीन को अपने गर्भ में ले लिया है। यह सिलसिला अभी भी अनवरत जारी है। ग्रामीणों के अनुसार यह स्थिति विभागीय अनदेखी के कारण ही उत्पन्न हुई है। इस गांव के लिए बचत में धन होने के बावजूद भी समय रहते कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया। ऐसे में इस गांव की भयंकर बर्बादी के बाद 17 करोड़ एक लाख की एक योजना स्वीकृत हुई थी।

गांव के जानकार बताते हैं कि उसी योजना से 2015-16 में कटानरोधी कार्य कराया गया। इसके बाद भी लगभग चार करोड़ धन बचत में था फिर भी बाढ़ खंड सोता रहा। अब जब स्थिति भयावह होने लगी है तो यह इलाका सभी को याद आने लगा है। इस चार करोड़ की बात छोड़ भी दें तो इस गांव में बाढ़ खंड ने 13 करोड़ रुपए खर्च कर दिए ¨कतु नतीजा कुछ नहीं निकल सका। 2015-16 में यदि इस गांव का कुछ नुकसान नहीं हुआ तो वह कार्य के बदौलत नहीं बल्कि नदी कृपा इसमें मुख्य रही। 2014 के बाद यहां घाघरा का रूख नरम रहा ¨कतु इस साल शुरुआत में ही हालात बेकाबू हो चले हैं।

स्पर तक को नहीं ढंक सका बाढ़ खंड –
इस गांव में विगत वर्ष के कटानरोधी कार्यों की मजबूती का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि यहां बीएसटी बांध के बचाव के लिए जो एंकर (स्पर) बनाए गए थे उसे ढंका तक नहीं जा सका है। नतीजा यह स्पर पिछले वर्ष की बाढ़ में ही आधा कट गए। इसके बावजूद भी संबंधित विभाग यहां के कटानरोधी कार्य को लेकर अपनी पीठ खुद से थपथपाने में कोई कसर बाकी नहीं रखा।

किसानों को भी नहीं मिला जमीन का पैसा –
वर्ष 2016 में जिन किसानों की जमीन में स्?पर बनाए गए उनका मुआवजा भी आज तक संबंधित विभाग नहीं दे सका है। इसमें यूपी-बिहार दोनों सीमा के किसनों की जमीन है। सिताबदियारा रावल टोला के किसान जोखन ¨सह ने बताया कि तब बाढ़ खंड किसानों को जमीन के लिए 27 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने को कहा था। कार्य होने के बाद से किसान दौड़ते रह गए किंतु मुआवजे के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं मिला।

 

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