मुआवजे में मिले 82.78 लाख धोखाधड़ी कर हडपे, सुप्रीमकोर्ट के आदेश को नजरअंदाज़ कर रहे कोतवाल

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सुलतानपुर: दलित मां-बेटे को फ़ोरलेन मुआवजे में मिले 82.78 लाख रूपये धोखाधड़ी कर हड़पने का मामला सामने आया है। इस संबंध में भुक्तभोगी वृद्ध महिला ने कोतवाली जाकर तहरीर दी है। जिस पर नगर कोतवाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करते हुए जांच करने के बाद एफआईआर दर्ज करने की बात कही है।

मामला कोतवाली नगर क्षेत्र अन्तर्गत स्थित सिंडिकेट बैंक से जुड़ा हुआ है। जहां पर हुई घटना का जिक्र करते हुए दलित महिला सुमेरा देवी पत्नी स्व. पदारथ निवासिनी अभियाकला थाना कोतवाली देहात तहसील लंभुआ ने कोतवाली में तहरीर दी है। आरोप है कि उसे व उसके बेटे अवधेश को अभियाकला स्थित भूखण्ड संख्या 475 की जमींन फ़ोरलेन में अधिग्रहीत किए जाने के चलते उसके एवज में मुआवजे की रकम मिलनी थी। जो काफी दिनों तक नहीं मिली तो उसके गांव के ही सुरेमन वर्मा अपनी पत्नी के साथ उसके घर आये अपने करीबी उदयराज वर्मा निवासी लोदीपुर थाना कोतवाली देहात के माध्यम से जल्द ही रूपये दिलाने का झांसा दिया। जिसके बाद सुरेमन वर्मा अपने सहयोगी उदयराज व उसके बेटे के साथ दलित महिला के घर पहुंचे और उसके बेटे व उससे कई कागजातों पर अंगूठा लगवा लिया। मुआवजे की रकम दिलाने के बहाने जिला मुख्यालय से लेकर सम्बन्धित बैंक में भी कई बार इन लोगों ने दलित महिला व उसके बेटे को बुलवाया। इतना सबकुछ होने के बाद भी जब दलित महिला को पैसे काफी दिनों तक नहीं मिले तो उसने दूसरे की मदद से बीते 4 फरवरी को शहर स्थित सिंडिकेट बैंक से अपने बैंक खाते की जांच कराई तो पता चला कि 19 मई 2016 को ही उसके व उसके बेटे के खाते में सम्बन्धित विभाग द्वारा 41.39 – 41.39 लाख रूपये भेजे गए है, लेकिन धोखाधड़ी कर बैंक कर्मियों की मिलीभगत से उदयराज ने 20 मई 2016 को दोनों के खाते से 30 – 30 लाख रूपये व 31 मई 2016 को 11.39 -11.39 लाख रूपये ट्रांसफर करवा लिया है। यह खुलासा होने पर जब वह अपने गांव के सुरेमन वर्मा के पास उदयराज से रूपये वापस कराने की बात करने गई तो आरोप के मुताबिक सुरेमन ने उसे जाति सूचक गालिया देते हुए जान से मरवा डालने की भी धमकी दी। इस संबंध में दलित महिला ने कोतवाली नगर में जाकर तहरीर दी है। जिस पर नगर कोतवाल पंकज वर्मा ने जांच करने के बाद मुकदमा दर्ज करने की बात कही है।

यह है सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था

वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने एक प्रकरण के फैसले के दौरान सभी राज्यों की पुलिस के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-154 का मंतव्य स्पष्ट करते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है, चाहे वह सूचना झूठी हो अथवा सही,इसमें प्रारंभिक जांच की अनुमति नही है।ऐसे मामलो में जो भी जांचे होगी वह एफआईआर दर्ज करने के बाद ही होगी। इस संबंध में आनाकानी करने व लापरवाही बरतने पर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का भी नियम है।बल्कि कोर्ट ने कहा है कि पुलिस की जांच के बाद मामला यदि झूठा पाया जा रहा है तो झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले पर भी केस चलाया जा सकता है।

लंभुआ क्षेत्र से जुड़ा फोरलेन घोटाले का चौथा बड़ा मामला

गरीब-असहायों को फोरलेन मुआबजे में मिली बड़ी रकम जालसाजों द्वारा हड़पने का यह चौथा चर्चित मामला है।मालूम हो की इसके पहले गोपालपुर(कोतवाली देहात) से जुड़े मामले में दाना पानी रेस्टोरेंट के संचालक संजीव वर्मा व सह आरोपी मिठाईलाल आदि जेल की हवा खा चुके है।वही बीते दिसम्बर माह में लंभुआ से एक दूसरे मामले में आरोपी लिपिक केसरी प्रसाद श्रीवास्तव जेल भेजे जा चुके है।वही पन्ना टिकरी(कोतवाली देहात) निवासी दलित रामगोपाल को मिली मुआबजे की रकम हड़पने के चक्कर में उसकी हत्या के आरोप में भी 3 लोगो के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ है,जिनमे से एक जेल में है।

रिपोर्ट–संतोष कुमार यादव

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