इस कुर्दिश महिला फाइटर के नाम से भी थर्राता है ISIS, हत्या करने वाले को 10 लाख अमेरिकी डालर का इनाम

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दुनिया भर में आतंक पर्याय बन चुके ISIS के आतंकियों को भी डर लगता है किसी चीज से तो यह कहना मुझे लगता एक मजाक ही लगता है, या फिर कहें तो ऐसा सुनकर बस हँसी ही आती है कि जिनके खौफ से पूरी दुनिया घबराती है और जिनका खौफ और दहशत का ही कारोबार हो भला उन्हें किससे खौफ लगेगा | लेकिन आज आपको बता रहे कि दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन ISIS के आतंकियों को एक महिला लड़ाका से बहुत ही अधिक डर लगता है नतीजतन ISIS के चरमपंथियों ने उस महिला के सर पर 10 लाख अमेरिकी डालर का इनाम भी रख दिया है |

विश्वविद्यालय की लड़ाई छोड़ ISIS के खिलाफ युद्ध में हुई थी शामिल –
बता दें कि वर्ष 2014 में इस कुर्दिश- दानिश युवती जोआना पलानी ने ISIS के आतंकियों के विरुद्ध जंग लड़ने के लिए विश्वविद्यालय की पढ़ाई तक छोड़ दी थी | समाचारपत्र ‘द इन्डिपेन्डेन्ट’ के मुताबिक, जोआना पलानी इस वक्त जेल में बंद है, और जून, 2015 में यात्रा पाबंदी लगाए जाने के बाद देश छोड़ देने के आरोप में कोपेनहेगन में मुकदमे का सामना कर रही है |

बता दें कि जोअना पलानी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई मंगलवार से शुरू हो चुकी है, यदि उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया जाता है तो उन्हें 2 साल तक की सजा हो सकती है | आपको यह भी बता दें कि सिर्फ ऐसा नहीं कि जोआना को लेकर कोइ पहली बार धमकी या फिर इस तरह की बातें आई इससे पहले भी जोआना के डेनमार्क वापसी पर तमाम तरह की ऑनलाइन और ऑफलाइन धमकियाँ आती रही है |

पिछले साल पुलिस ने जब्त कर लिया था पासपोर्ट –
बता दें कि पिछले साल जब पुलिस ने जोआना पालनी का पासपोर्ट जब्त कर लिया था उसके तत्काल बाद जोआना ने अपने फेसबुक पर लिखा था कि मैं खुद एक ऐसी सेना का आधिकारिक तौर पर हिस्सा हूँ जो ISIS के विरुद्ध युद्ध लड़ रही है भला मैं डेनमार्क के लिए कैसे ख़तरा बन सकती हूँ | उन्होंने यह भी लिखा था कि जबकि उस सेना को डेनमार्क खुद प्रशिक्षित करता है |

कौन है जोआना पालनी ?
बता दें कि जोआना पालनी एक इराकी मूल की महिला है, जिनका जन्म प्रथम खाड़ी युद्ध के दौरान ईराक के रमादी के एक शरणार्थी शिविर में हुआ था | जब वे बहुत छोटी थी तभी उनके परिवार को डेनमार्क में शरण मिल गयी थी और तब से वह डेनमार्क की ही नागरिक बन गयी थी |

जब वर्ष 2014 में आईएसआईएस उभरने लगा, तो उनके खिलाफ लड़ने के लिए कुर्दिश आंदोलन में शिरकत करने की खातिर जोआना पलानी ने राजनीति विषय की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी, और उत्तरी सीरिया में कुर्दिश पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिटों (वाईपीजी) तथा इराक में पेशमेग्रा फौज – दोनों की तरफ से लड़ने लगी |

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर एक पोस्ट में जोआना पलानी ने लिखा था, “महिला अधिकारों, लोकतंत्र – तथा दानिश लड़की होने के नाते जिन यूरोपीय मूल्यों को मैंने सीखा – की खातिर लड़ने के लिए” उसे प्रेरणा मिली…

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