नहर में पानी न होने से सिंचाई के लिये किसान परेशान

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चाँदमारी/वाराणसी (ब्यूरो)- बिजली की आँख मिचौली और नहर में पानी न होने से ग्रामीण इलाकों में गेहूँ की खेती करने वाले किसानों के सामने सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गयी है| बता दें की गेहूँ की फसल में दाने पड़ना शुरू हो गये हैं और इस समय इसे सिंचाई की बेहद आवश्यकता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली की लगातार आँख मिचौली करने से किसान अपने फसल की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं |

वहीं हरहुआ विकास खंड में दर्जनों गाँव के किसान नहर के पानी से सिंचाई करते हैं | शारदा सहायक नहर के किनारे रहने वाले पुआरीकला, पुआरीखुर्द, सेमरी, अहरक, आयर, औरा, अटेसुआ, चंदापुर आदि गाँवों के किसान इसी नहर के भरोसे पर खेती करते हैं लेकिन विडम्बना यह है की जब भी सिंचाई का समय आता है नहर सुख जाती है जिससे किसानों को काफी नुकसान होता है | इसके लिये शिकायत के बावजूद भी समस्या पर कोई प्रभाव नहीँ पड़ता |

हर बार की भाँति इस बार भी जब फसल में सिंचाई की आवश्यकता है तो नहर पूरी तरह से सुख गयी है जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगीं हैं | किसानों की चिंता लाज़मी है क्योंकि एक ओर नहर सूखी पड़ी है तो दूसरी ओर बिजली की स्थिति यह है की ठीक से सिंचाई कर पाना मुश्किल हो रहा है | पुआरीखुर्द के किसान संजय सिंह कहते हैं कि हम लोगों कि खेती इस नहर के पानी पर ही निर्भर रहती है लेकिन ज़रूरत के समय नहर के सूखने की वजह से खेती में काफी नुकसान होता है,तो वहीं औरा के जिगेंद्र पाण्डेय कहते हैं की इस समय गेहूँ की फसल को पानी देना अत्यंत ज़रूरी है पानी नहीँ मिलने पर फसल की उत्पादन प्रभावित होगी लेकिन नहर में पानी नहीँ होने से किसान मायूस हैं |

कमोबेश यही हाल अन्य किसानों का भी है जो नहर के भरोसे पर खेती करते हैं लेकिन सिंचाई विभाग को जैसे किसानों की समस्याओं से कोई लेना देना ही नहीँ है,तो वहीं जनप्रतिनिधियों को भी किसानों की समस्या से कोई मतलब नही | किसानों का वोट लेने के लिये चुनाव के समय तो बड़े बड़े वादे किये जाते हैं परन्तु चुनाव जाते ही सब कुछ भूल जाता है | अब देखना है की सिंचाई के समय नहर के सूखने की समस्या से क्षेत्रीय किसान कब निजात पाते हैं |
रिपोर्ट-नागेन्द्र कुमार यादव

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