महिला पत्रकार पर केस वापस लेने का दबाव बना रही पुलिस, डराने-धमकाने की हो रही कोशिश

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सुल्तानपुर ब्यूरो : महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा के साथ हुए जहरखुरानी मामले में पुलिस लीपा पोती में जुट गई है। महिला पत्रकार मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि बिना मेडिकल परीक्षण के पुलिस अपनी मनमानी कर रही है। मीनाक्षी का आरोप है कि पुलिस उनके बेटे को बरगलाने में जुटी है और उनपर भी दबाव बना रही है।

अमेठी की महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा के गंभीर केस को 26 मार्च को मीडिया द्वारा उठाने के बाद लखनऊ स्थित पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय से अमेठी पुलिस को जांचकर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश प्राप्त हुआ। आनन-फानन में अमेठी एसपी ने ट्रेनी सीओ बीनू सिंह के हाँथ में मामले की विवेचना सौंप दी। विवेचना अधिकारी के रूप में एक महिला पुलिस अधिकारी को देखकर महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा को अपने साथ इंसाफ मिलने की आस बंध गयी थी। लेकिन 31 मार्च, शुक्रवार को अमेठी से जो जानकारी प्राप्त हुई उसने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब लग रहा है कि इंसाफ की यह लड़ाई दूर तक जाने वाली है।

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने पुलिस महकमें को साफ़ निर्देश दिया था कि किसी मीडिया कर्मी का उत्पीड़न हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नही जायेगा। लेकिन लगता है कि मुख्यमंत्री के इस सन्देश का अमेठी पुलिस पर कोई असर नही है। ज्ञात हो कि महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा ने अपने पति अमित मिश्रा, ननद डॉ उर्मिला शुक्ला व पूनम तिवारी पर आरोप लगाया था कि यह तीनों पूर्व में पंजाब में उसे धीमा जहर देकर जान से मारने की कोशिश कर रहे थे । जहाँ से जान बचाकर अमेठी मे ससुराल के घर में अपने एकलौते पुत्र अक्षज मिश्रा के साथ किसी तरह जीवन यापन कर रही मीनाक्षी मिश्रा को दुकानदारों के जरिये धीमा जहर दिला कर जान से मारने की कोशिश की जा रही है। डीजीपी कार्यालय से जांच का आदेश आने के बाद विवेचना अधिकारी बीनू सिंह मीनाक्षी मिश्रा के घर पहुँची और मीनाक्षी मिश्रा पर इस बात के लिए दबाव बनाते हुए कि मामला मीडिया में क्यों उछाला दो घण्टे तक बयान लिया। पति अमित मिश्रा को पंजाब से बयान के लिये बुलाया, जो कि शुक्रवार को हुआ।

सीओ ने उनके पति से क्या बयान लिया ये तो वही बता सकती हैं। लेकिन बयान खत्म होने के बाद वे फाइनल रिपोर्ट लेकर एसपी ऑफिस गयीं। और वहाँ से लौटकर पत्रकार के आरोपों को निराधार बता दिया। साथ ही कमजोर धाराओं में मुकदमा लिखाने के लिये दबाव बनाने लगीं। जिसको सुनकर मीनाक्षी मिश्रा के होश उड़ गए।

अब सवाल यह है कि यदि सीओ मीनाक्षी के साथ हो रही जहर खुरानी को निराधार बता रही हैं तो जरूर उनके पास इसका पुख्ता आधार होगा। जहाँ तक जहरखुरानी हुई है या नही इसका फैसला करने के लिये एक ही उपाय है और वो है मेडिकल ऑफिसर द्वारा परीक्षण। इसका मतलब सीओ साहिबा ने मीनाक्षी का मेडिकल कराया और उसकी रिपोर्ट में ऐसा कुछ नही आया जिससे महिला पत्रकार के साथ हो रही जहर खुरानी की पुष्टि हो सके। और यदि बिना मेडिकल कराये ही सीओ इस निष्कर्ष पर पहुँच गयी कि वास्तव में मीनाक्षी से जहरखुरानी नही हो रही है तो विवेचक की भूमिका भी संदेहो के घेरो में है। वही इस मामले में सीओ बीनू सिंह ने बताया कि जहरखुरानी की जांच के लिये हमने आरोपित दुकानदारों से नमूने लेकर जांच के लिये भेज दिया है। जिसकी रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा कि मामला क्या है। विदित हो कि मीनाक्षी मिश्रा ने आरोप लगाया था कि ससुराल पक्ष के द्वारा दुकानदारों के जरिये उसे धीमा जहर देकर जान से मारने की कोशिश की जा रही है। अतः मीनाक्षी द्वारा पुलिस की निगरानी में खरीदे गए सामान को फोरेंसिक जांच के लिये भेजा जाना था। मीनाक्षी के घर का मुआयना करके फॉरेंसिक जांच होनी चाहिये थी। जिन सब बातों को विवेचक ने सिरे से नकार दिया और अपना राग अलापती रही। वही एक विवेचक महिला कांस्टेबल ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि हम इनके घर के हर सामान की फॉरेंसिक जांच का ठेका नही लिये हैं।

वही मीनाक्षी ने थाने में पक्षपात की पूरी कहानी विस्तार से शब्दों में बयां की। उनके अनुसार महिला थाने में आरोपित पति अमित मिश्रा के साथ वीआईपी ट्रीटमेंट हुआ। फाइनल रिपोर्ट लगाने जाते हुए विवेचक ने आरोपी से चाय कॉफी के लिये पूछा। वही पत्रकार का बयान लेते वक्त पत्रकार के बीमार होने के कारण माँ के साथ आने पर उन्होंने जबर्दस्ती बाहर करने की कोशिश करने लगीं। मीनाक्षी का आरोप है कि सीओ ने उनके 10 वर्षीय बेटे जो कि लिखने पढ़ने में सक्षम है, अक्षज मिश्रा से जहर खुरानी के बाबत सवाल पूछा तो उसने बताया कि कैसे पिता को उसकी माँ के खाने में कोई पाउडर जैसी चीज मिलाते हुए देखा था। अक्षज ने यह भी बयान दिया कि उसके पिता उसे छत पर ले जाकर फेंकने की कोशिश करते थे कि तुम्हारी दूसरी माँ है उसके पास चलो अपनी माँ को छोड़ दो नही तो यही से फेंक दूंगा। इन सब बातों को सीओ साहिबा ने नजरअंदाज करते हुए रिकॉर्ड करना जरूरी नही समझा। साथ ही बेटे को भड़काती रही कि तुम इनके चक्कर में मत पड़ो तुम्हे आराम से अपनी जिंदगी जीनी चाहिये। वही सीओ साहिबा तो पीड़ित के ऊपर आरोपी पति पर भरोसा करने व पंजाब जाने का दबाव भी डालने लगी। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया क्या तुम्हे प्रॉपर्टी चाहिये या फिर तुम तलाक देना चाहती हो।
ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पत्रकार का आरोप सही है और लगातार उसके व उसके बच्चे के साथ जहर खुरानी हो रही है तो पुलिस की ये लापरवाही उनके लिये जानलेवा साबित होगी। साथ ही यदि पुलिस आरोपियों का पक्ष ले रही तो क्या आरोपियों के हौसले और अधिक बुलंद नही होंगे। आरोपी ने अनेक बार पत्रकार से कहा कि पैसा बोलता है और हमारा गुनाह कभी साबित नही होगा। वही बातें सच साबित होती नजर आ रही हैं और पुलिस आरोपियों को पाक साफ घोषित करने में लगी है। देखना बाकी है कि जिंदगी की जद्दोजहद के मध्य पत्रकार मीनाक्षी मिश्र के हौसले पस्त होते हैं या आरोपी अपने नापाक मंसूबो में कामयाब हो जाते हैं।

रिपोर्ट- संतोष कुमार यादव

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