सुखोई वाली ग़लती को पुनः नहीं दोहराएगा भारत, रूस के साथ पाँचवी जनरेशन के फ़ाइटर जेट्स बनाने से पहले रखी ये शर्त

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नईदिल्ली– भारत हथियारों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा आयतक देश है। दुनिया के कई देश भारतीय बाज़ार में अपने हथियारों को बेंचने के बारे में लगातार विचार विमर्श करते रहते है लेकिन दशकों से भारत रूस के साथ ही रक्षा सम्बंधी मामलों पर सबसे अधिक समझौते करता रहा है। इसी क्रम में आपको बता दें कि भारत और रूस ने साथ मिलकर पाँचवी पीढ़ी के उन्नत फ़ाइटर जेट्स बनाने का निर्णय लिया था लेकिन हाल ही में भारत ने इन विमानों को बनाने से पहले रूस के साथ एक शर्त रख दी है।

भारत ने रूस के समक्ष शर्त रखते हुए कहा है कि वह जवाइंट्स डिवेलपमेंट और प्रॉडक्शन पर काम तभी करेगा जब रूस उसे टेक्नॉलजी को पूरी तरह से ट्रांसफ़र करने के लिए सहमत हो जाएगा। भारत ने स्पष्ट तौर पर यह भी कहा है कि वह सुखोई MKI30 वाली ग़लती को पुनः नहीं दोहराएगा। जिसमें भारत के साथ रूस ने पूरी तरह से टेक्नॉलजी का ट्रान्स्फ़र नहीं करेगा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यदि रूस भारत के साथ टेक्नॉलजी का हस्तांतरण करता है तो उसके बाद भारत को स्वदेशी एयरक्राफ़्ट डिज़ाइन करने में मदद मिलेगी।

सूत्रों के हवाले से ख़बर है कि यह फ़ैसला शीर्ष स्तर पर लिया गया है, जिससे सुखोई 30 MKI फ़ाइटर जेट्स विमानों वाली ग़लती को पुनः दोहराया नया जा सके। बता देते है कि भारत और रूस के बीच सुखोई30MKI विमानों की डील में यही सबसे बड़ी चूक हो गयी थी रूस से पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण नहीं हो सका था। जानकारों का कहना है कि यदि भारत के पास पूर्ण टेक्नॉलजी होती तो भारत की घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी होती।

एचएएल सिर्फ़ असाएंबलिंग कर रहा है
बताते चले कि रूस के सहयोग से भारत में हो रहे 272 सुखोई विमानों में से अब तक 240 विमानों का निर्माण एचएएल के द्वारा किया जाता चुका है। हालाँकि एचएएल केवल और केवल असेंबलिंग ही कर रहा है। आज भी एचएएल अपने स्तर पर सुखोई की मैन्युफैक्चरिंग नहीं कर सकता है।

भारत ने रूस के समक्ष रखी दो बड़ी शर्तें
आपको बता दें कि भारत ने रूस के समक्ष इस डील पर काम करने से पहले 2 बड़ी शर्तें रख दी है। इन दोनो शर्तों के अंतर्गत सबसे पहले भारत ने कहा है कि रूस को तकनीक का भारत के साथ पूर्ण हस्तांतरण करना होगा इसके अलावा भारत जो पाँचवी पीढ़ी का स्वदेशी एयरक्राफ़्ट बना रहा है उसमें भी रूस को सहयोग करना होगा।

हालाँकि अभी तक बता दें कि इस रिपोर्ट के आने के बाद रूस की तरफ़ से कोई भी बयान सामने नहीं आया है लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि यदि भारत की यह बातें रूस मान लेता है और डील हो जाती है तो निश्चित ही स्वदेशी एयरक्राफ़्ट बनाने की तरफ़ भारत और अधिक मज़बूती के साथ आगे बढ़ सकता है।

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