रामकथा के तीसरे दिन भगवत कृपा का हुआ वर्णन

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लालगंज-रायबरेली- स्वामी सूर्य प्रबोध परमहंस इण्टर काॅलेज अनंगपुरम रालपुर लालगंज मंे सात दिवसीय श्रीरामकथा एवं सन्त समागम के तृतीय दिवस पर आचार्य रामकृष्ण तिवारी ने भगवत कृपा, गुरू कृपा व स्वयं की कृपा का उल्लेख करते हुये कहा कि यद्यपि भगवत कृपा व गुरू कृपा सर्वदा कल्याण कारक होती है, परंतु जबतक स्वयं की कृपा नहीं होती तब तक उक्त दोनों कृपायें अपना प्रभाव नहीं दिखा पाती।

इसको कथा के माध्यम से समझाते हुये आचार्य प्रवर ने कहा कि विवाह मंडप मंे भगवान शिव के सानिध्य में आकर मां पार्वती के चित्त मंे शांति स्थापित हो गयी और उन्हंे पूर्व जन्म की घटनायें याद आने लगी और उस समय भगवान शंकर और सप्त ऋषियों की वाणी पर अविश्वास करने की बात याद आते ही वे विनयपूर्वक भगवान शिव से कहती है कि उस समय मेरी कृपा ही मेरी ऊपर नहीं थी, जिसका परिणाम यह हुआ कि मुझे पिता राजा दक्ष के यज्ञ में आत्महुति देनी पड़ी।

आज मेरी कृपा स्वयं मेेरे ऊपर है। कृपा करके उन्हीं राम की कथा स्वयं अपने मुख से सुनाकर मेरे मन का संदेह दूर करें। इस कथा के माध्यम से व्यास ने बताया कि श्रीरामकथा का फल पाने के लिये हमे सत्संग व संत समागम की शरण में जाना चाहिये। इस अवसर पर प्रमुख रूप से परमात्म स्वरूप स्वामी पल्ली बाबा के द्वारा भी लोगों को सत्संग की शिक्षा दी गयी।

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