मनरेगा के अन्तर्गत बड़े पैमाने पर सरकारी धन का बंदरबांट

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बीघापुर/उन्नाव(ब्यूरो)- विकास खण्ड की ग्राम सभा मगरायर में मनरेगा के अन्तर्गत बड़े पैमाने पर सरकारी धन का बंदरबांट किए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी व मुख्यविकास अधिकारी को शिकायती पत्र के माध्यम से घोटालों के जिम्मेदार व भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्यवाही किए जाने की मांग की है।

जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को दिए गए शिकायती पत्रों में गांव के संजीव कुमार मिश्रा, बबलू पाण्डेय, सिद्धि किशोर और कपिल तिवारी आदि ने कहा है कि वर्ष 2015-16-17 के अन्तर्गत ग्राम पंचायत मगरायर में शिवदीनखेड़ा माइनर से बड़े तालाब तक नाला खुदाई कार्य में भारी वित्तीय अनियमितता, फर्जी कार्य दर्शा कर बड़े पैमाने पर सरकारी धन का घोटाला किया गया है।

आरोप है कि 700ग1.50 मी0 जो नाला स्वीकृत था खुदाई के लिए उसकी लम्बाई चैड़ाई उतनी है ही नहीं। इस नाले की खुदाई में रु0 1.45800/- का स्टीमेट था जिसे बाद में रु0 2.46/- लाख दर्शाया गया। जबकि इस नाले की खुदाई में मनरेगा मानकों के विपरीत कम कार्य, कम मजदूर, कम मटैरियल का प्रयोग कर अधिकतम दर्शा कर फर्जी मजदूरी का भुगतान कर लिया गया है। वहीं जिस नाले को खुदवाया जाना दिखाया गया वह पहले से ही खुदा हुआ था। सिर्फ उसी की घास साफ कर ड्रेसिंग कर दी गई। और 4 से 5 मनरेगा मजदूर लगा कर 10 दिन कार्य करा कर उसके स्थान पर फर्जी तरीके से लाखों रु0 का भुगतान करा लिया गया है।

इसी प्रकार वर्ष 2016-17 में इसी ग्राम सभा के अन्र्तगत रमसगरा तालाब की खुदाई व जीर्णोद्धार कार्य में भी भारी वित्तीय अनियमितताएं फर्जी कार्य दर्शा कर की गई हैं। इस तालाब के लिए स्वीकृत स्टीमेट रु0 395900.00/- था। इस तालाब की लम्बाई ग चैड़ाई 80ग60 व गहराई गलत दिखा कर उसकी खुदाई में रु0 362790/- का फर्जी भुगतान करा लिया गया है।

जबकि तालाब की वास्तविक लम्बाई चैड़ाई गहराई कुछ अलग ही है। तालाब की गहराई में कोई खुदाई की ही नहीं गई,केवल आस पास की घास फूस व झाड़ियां कटवा कर वित्तीय धोखाधड़ी करने के लिए साक्ष्य छिपाने के साथ तालाब के चारों ओर मिट्टी की पर्त फैला दी गई है। जबकि इस तालाब का ग्राम प्रधान गीता दीक्षित के पूर्व के कार्यकाल में खुदाई व सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जा चुका है।

सरकारी धन के बंदरबांट में भ्रष्टाचार करते हुए इस पूरे प्रकरण में तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं ने दिए गए अपने शिकायती पत्रों में जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि उक्त मामलों में हुए भ्रष्टाचार व सरकारी धन के बंदरबांट की टीएसी टीम गठित कर निष्पक्ष जांच करा कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराते हुए धन वसूली सहित कठोरतम दण्डात्मक कार्यवाही की जाए।

रिपोर्ट-मनोज सिंह

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