गरीब को सुलभ और सस्ता न्याय मिलने के रास्ते में अड़ंगा डाल रहा जिले का न्याय विभाग

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बांगरमऊ/उन्नाव (ब्यूरो) क्षेत्र के ग्राम आबापारा निवासी हाईकोर्ट लखनऊ के वरिष्ठ अधिवक्ता फारूक अहमद ने कहा है कि उनकी मंशा बांगरमऊ क्षेत्र के गरीब और बेसहारा लोगों को त्वरित सस्ता और सुलभ न्याय दिलाना है। लेकिन जिले का न्याय विभाग जनहित के इस पुनीत कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब अदालत के लिए सिर्फ एक बीघा जमीन की ज़रूरत है तो जिले का न्याय विभाग यहां के राजस्व विभाग से 30 बीघा जमीन की मांग क्यों कर रहा है। ग्राम समाज की 30 बीघा जमीन उपलब्ध करा पाना यहाँ के राजस्व विभाग के लिए मुमकिन नहीं है।

पुरस्कार प्राप्त अधिवक्ता श्री अहमद ने आज यहाँ पत्रकारों को बताया कि बांगरमऊ के सुदूर क्षेत्र सुल्तानपुर, बेहटा, कच्छ, भिक्खनपुर, गोपालपुर, जटपुर, बेल्थरा आदि सैकड़ों गांव से जिला मुख्यालय की दूरी करीब 75 किलोमीटर है । इतनी लंबी दूरी पर न्यायालय स्थित होने के चलते खासकर गरीब जनता को सस्ता और सुलभ न्याय मिलने में भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर उन्होंने स्थानीय तहसील स्तर पर मुंसिफ कोर्ट स्थापित करने के लिए हाईकोर्ट लखनऊ में करीब 4 वर्ष पूर्व जनहित याचिका दायर की थी। जिस पर विगत 4 दिसंबर को अदालत में अपना निर्णय सुनाते हुए राज्य सरकार को मुंसिफ कोर्ट स्थापित करने के लिए शीघ्र मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था ।निर्णय के तहत राजस्व विभाग को अदालत की स्थापना के लिए मात्र 2971 वर्ग मीटर अर्थात करीब एक बीघा ग्राम समाज की जमीन उपलब्ध कराना था ।लेकिन जिले का न्याय विभाग और बार एसोसिएशन यह नहीं चाहता है कि इस तहसील में कोई भी कोर्ट की स्थापना हो। क्योकि उन्नाव बार एसोसिएशन को लग रहा है कि उनका धंधा मंद पड़ सकता है। श्री अहमद ने कहा कि इसीलिए जनहित के इस कार्य में अड़ंगा डालने के लिए जिला न्याय विभाग ने यहाँ के राजस्व विभाग से एक बीघा के बजाय तीस बीघे जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश जारी कर दिया । उन्होंने कहाकि नगर क्षेत्र में बीस एकड़ सरकारी भूमि उपलब्ध करा पाना राजस्व विभाग के लिए नामुमकिन है ।श्री अहमद ने कहा कि एसोसिएशन के इशारे पर न्याय विभाग द्वारा की गई हेरा फेरी की शिकायत जल्द ही वह उच्च न्यायालय में करेगे और यहाँ मुंसिफ कोर्ट की स्थापना करवाकर ही दम लेगे ।

नगर क्षेत्र में ग्राम समाज की इतनी भूमि तो है नहीं ।लेकिन साहब के हुक्म की तामील तो करना ही है ।अब इसी हुक्म की तामील में तहसील प्रशासन ने काश्तकारों की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। जिससे काश्तकारों में हड़कम्प मच गया है।यहाँ पर आश्चर्यजनक तो यह है कि लखनऊ स्थित हाई कोर्ट का पुराना भवन भी तीस बीघा से कम रकबे में ही होगा, तो फिर मुंसिफ कोर्ट के लिए तीस बीघा ज़मीन क्यों मांगी जा रही है ।

रिपोर्ट – रघुनाथ प्रसाद

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