विधि आयोग के प्रस्ताव के विरोध में वकीलों ने किया कार्य बहिष्कार

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जौनपुर(ब्यूरो)- दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के सभागार में दिनेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में एक आपात बैठक आहूत की गई , जिसका संचालन मंत्री अनिल सिंह कप्तान ने किया| जिसमें बार कौंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र के आह्वाहन पर विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन के विरोध में बांह पर सफेद पट्टी बांधकर पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया।

मालूम हो कि विधि आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति बी एस चौहान ने जो संशोधन का प्रस्ताव रखा है वह उसके क्षेत्राधिकार से बाहर, दुर्भाग्यपूर्ण तथा बार की स्वायत्तता पर कुठाराघात है। इसमें अधिवक्ताओं पर इतने अंकुश लगाए जा रहे हैं कि उनका विधि व्यवसाय करना असंभव हो जाएगा। इसके अनुसार न्यायालय को जहां अधिवक्ताओं का लाइसेंस समाप्त करने का अधिकार हो जाएगा वहीं वादकारियों को संतुष्ट न होने की स्थिति में वकीलों को दिया गया मेहनताना वापस पाने का हक मिल जाएगा। अधिवक्ताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों को मोटा वेतन देने के बावजूद उन पर कोई अंकुश नहीं है जबकि वकीलों को न तो वेतन दिया जाता है और न ही पेंशन, फिर उन पर इतना अंकुश क्यों लगाया जा रहा है।

संविधान के अनुच्छेद २२७ में उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालयों पर सिर्फ निगरानी का अधिकार दिया गया था, किन्तु सान्याल कमेटी के रिपोर्ट के आधार पर एडवोकेट ऐक्ट के मूल ड्राफ्ट में संशोधन करके धारा ३४ जोड़कर अधिवक्ताओं के लिए नियम बनाने की अनुमति दे दी गयी , जबकि यह काम बार काउंसिल का है। बैठक को तेज बहादुर सिंह,प्रेम शंकर मिश्र , जय प्रकाश कामरेड , इन्द्रजीत पाल , मंजू शास्त्री , बृजेश सिंह इत्यादि अधिवक्ताओं ने संबोधित किया।

रिपोर्ट- डॉ. अमित कुमार पाण्डेय
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