लेखपालों की अघोषित दादागिरी, कई सरकारी कामों से किया अपने को अलग, सरकार की मंशा पर फिरा पानी

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प्रतापगढ़ (ब्यूरों)- राशन कार्ड और समाजवादी पेंशन सत्यापन करने से लेखपालों द्वारा अपने को अलग करने से सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लग गए हैं। जिस तरह की राशन कार्ड और समाजवादी पेंशन में सत्यापन के नाम पर कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है, उससे तो नही लगता कि सरकार की मंशा फलीभूत हो।

कभी भी गांवों में न दिखने वाले लेखपालों की अघोषित दादागिरी बढ़ती जा रही है। संगठन के नाम पर अब वे सरकारी कामों में भी अपनी रुचि नही दिखा रहें हैं और जबरिया काम करवाने पर हड़ताल पर जाने की धमकी देते रहते हैं।

जिले के सबसे बड़े अधिकारी डीएम अपने ही विभाग पर नियंत्रण नही रख पा रहें हैं। संगठन के नाम लेखपालों ने अपने को राशन कार्ड और समाजवादी पेंशन सत्यापन से अलग कर लिया है। लेखपालों का कहना है कि वे इस काम को नही करेंगे। ग्रामीणों की माली हालत का पता उनकी संपंत्ति के अलावा उनके जमींन से भी पता चलता है और जमींन संबंधी सभी रिकार्ड लेखपालों के पास होते हैं, लेकिन लेखपालों के इस काम के बहिष्कार करने से सरकार की अपात्रों को छाटने की मंशा पर ही सवालियां निशान लग जाएंगे।

गौरतलब है कि पूर्व प्रभारी जिला अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह ने सरकार द्वारा अपात्र राशन और समाजवादी पेंशन पाने वालों की सत्यापन करने में लेखपालों की ड्यूटी लगाई थी, कुछ दिनों तक लेखपालो ने काम भी किया लेकिन अपने संगठन के आह्वाहन के बाद उन्होंने इस सत्यापन को बंद कर दिया।

हालांकि लेखपालों द्वारा सत्यापन करने से अपने हाँथ खीच लेने से अन्य कई सारी विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जिले के सबसे बड़े अधिकारी डीएम और सरकार सभी विभाग के कर्मियों के ऊपर तो कार्यवाही करते हैं लेकिन अपने विभाग और लेखपालों के ऊपर कोई भी कार्यवाही नही करते, जिससे लेखपाल हमेशा मनमानी करते हैं। हालांकि डीएम के बयान से भी लगता है कि वो सत्यापन न करने वाले लेखपालों के ऊपर कोई कार्यवाही नही करेंगे।

इस सम्बंध में डीएम शरद कुमार सिंह का कहना है कि यदि लेखपाल काम नही करते तो उनसे बात की जाएंगी, यदि नही मानते तो दूसरे एजेंसी से सत्यापन कराया जायेगा।

रिपोर्ट- विश्व दीपक त्रिपाठी

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