दो अनाथ बच्चों ने पीएम मोदी को लिखा खत कहा, मां ने छोड़े थे 96000 के पुराने नोट, बहन के नाम पर करवा दें FD

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                                                                    फोटो श्रेय – NDTV

कोटा- राजस्थान के कोटा जिले के एक आश्रलय में अपना जीवन गुजारने वाले दो मासूम बच्चों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को एक बहुत ही भावुक खत लिखा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को लिखे खत में दोनों भाई बहनों ने अपील की है कि उनकी मां ने अपने जीवन भर की मजदूरी से जो पैसे इकट्ठे किए थे उन्हें नोटबंदी की मार से बचा ले बच्चों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख उनसे आग्रह किया है की उनकी मां की मेहनत मजदूरी से कमाए हुए छान 90500 रुपए को उनकी बहन के नाम पर ऍफ़ डी करवा दें जिस से कम से कम उसकी बहन का जीवन तो सुरक्षित हो सके।

आपको बता दें कि सूरज और सलोनी नाम के इन दोनों बच्चों के माता पिता नहीं हैं 4 साल पहले इनकी मां की हत्या हो चुकी है यह दोनों ही बच्चे कोटा के एक बाल कल्याण समिति में रहकर अपना जीवन गुजार रहे हैं। हाल ही में समिति के आदेश पर पुलिस ने उनके गांव के पुस्तैनी मकान की तलाशी कराई थी इस दौरान उनके घर से सोने चांदी के कुछ जेवरात एक बक्से में तथा उसी संदूक में हजार रुपए के 22 नोट तथा ₹500 के 150 नोट भी प्राप्त हुए थे। लेकिन आपको बता दें कि यह नोट तब मिले जब नोट बदलने की आखिरी तारीख भी समाप्त हो चुकी थी ऐसे में समिति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने उन्हें इस पूरी घटना से अवगत करवाया लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नोट बदलने से साफ इंकार कर दिया जिसके बाद ही इन बच्चों ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को खत लिख अपने दर्द को न केवल बयां किया है बल्कि उनसे यह भी निवेदन किया है कि कृपया उनके मां की जिंदगी भर की कमाई को बर्बाद होने से बचा ले।

बहन के नाम पर FD करवाने की कि अपील-
बच्चों ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि वह भले ही उनके पैसे को ना बदल दे लेकिन वह उनके उसी पैसे की एक एफडी उसकी छोटी बहन के नाम पर करवा दें जिससे कम से कम उसका जीवन सुरक्षित हो सके आपको बता दें कि बच्चों की मां की 2013 में हत्या की जा चुकी है जबकि उसके पिता की भी मौत हो चुकी है। खबर लिखे जाने तक प्रधानमंत्री श्री मोदी की तरफ से और ना ही प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई भी जवाब बच्चों को प्राप्त हुआ है अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जो प्रधानमंत्री एक महिला की स्टॉल की चाहत को 24 घंटे से कम वक्त में ही पूरा कर देते हैं वही प्रधानमंत्री और वही प्रधानमंत्री कार्यालय इन बच्चों की इस दरख्वास्त को कितने समय में सुनेगा।⁠⁠⁠⁠

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