१३ साल पहले हुई दो भाइयों की हत्या के मामले में चार को उम्रकैद

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सुल्तानपुर :- 13 साल पहले हुई दो सगे भाईयों की हत्या में सोमवार को विशेष सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह ने दो सगे भाईयों सहित चार मुजरिमों को उम्रकैद व 30-30 हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी मामले में आरोपी रहे एक अधिवक्ता व फौजी को अदालत ने साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया है।

मामला गोसाईगंज थानाक्षेत्र के गुरेगांव का है। जहां के रहने वाले अभियोगी ओम प्रकाश सिंह के मुताबिक 8 जून 2003 को उनकी चाची का शुद्ध होना था। सुबह साढ़े आठ बजे विपक्षी रामप्रताप सिंह, रामतीरथ सिंह, सुनील कुमार सिंह, प्रदीप सिंह, डब्बू सिंह, रिंकू सिंह, कौशलेन्द्र, महेन्द्र सिंह, कुलदीप व संदीप उनके दरवाजे के सामने नींव खोदने लगे। मना किया तो रामप्रताप व रामतीरथ के ललकारने पर विपक्षियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली रूद्र प्रताप सिंह, रमाशंकर सिंह, सुमन सिंह, ओम प्रकाश सिंह व उदयभान सिंह को लगी। रूद्र प्रताप सिंह व रमाशंकर सिंह की गोली लगने से मृत्यु हो गई। मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। आरोपी कुलदीप व संदीप का विचारण किशोर न्यायालय में चल रहा है। शेष अभियुक्तों के खिलाफ एडीजे चतुर्थ/स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट की अदालत में विचारण चल रहा था। विशेष लोक अभियोजक आरएस वर्मा ने 14 गवाहों एवं बचाव पक्ष ने 19 गवाहों को परीक्षित कराया। रामतीरथ सिंह ने घटना के समय सुलतानपुर में रहने व महेन्द्र सिंह ने फौज में अमृतसर रहने का तर्क दिया। अन्य अभियुक्तों ने कहा कि डकैती में हत्या हुई। करीब 14 साल तक चले मुकदमे के विचारण के दौरान प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उच्चस्तरीय अदालतों के निर्देशन में प्रकरण की सुनवाई लगातार होती रही। जिसके उपरान्त अदालत ने सुनील सिंह, प्रदीप सिंह व सगे भाईयों डब्बू तथा रिंकू सिंह को हत्या समेत अन्य धाराओ में दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 30-30 हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। वहीं अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी अधिवक्ता रामतीरथ सिंह व फौजी महेन्द्र सिंह को बरी कर दिया है। वहीं अदालत ने सभी आरोपियों को गैंगेस्टर अधिनियम के अन्तर्गत चल रहे विचारण में भी दोषमुक्त करार दिया है।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा

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