आजीवन सादा जीवन उच्च विचार के पोषक रहे ‘चन्द्रिका बाबू’ -19वीं पुण्य तिथि पर विशेष

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बलिया (ब्यूरो)- होनहार विरवान के होते चिकने पात“ के इस कहावत को जो पुरूष अपने कृतकार्य से जनसेवा कर अपने ग्राम, जनपद, प्रदेश और देश में गौरव प्राप्त करते है। उन्हें ही समाज याद करता है। बलिया जनपद के बालुपुर गाँव में श्री राम प्रसाद लाल के पुत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बलिया लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद स्व0 चन्द्रिका प्रसाद जिनकी 13 सितम्बर 2018 को 19वीं पुण्यतिथि पर विभिन्न समारोह का आयोजन किया गया है। स्व0 चन्द्रिका प्रसाद जी का जन्म 01 जुलाई 1917 को हुआ था। छात्र जीवन से ही वे परिश्रमी रहे थे। राजनीति का कार्य इन्होंने आर्यवीर दल के निष्ठावान कार्यकर्ता के हैसियत से शुरू किया इसके बाद कांग्रेस के संगठन बने।

जंगे आजादी के जमाने में कांग्रेस का कार्य करना लोहे का चना चबाना जैसा था। सन् 1942 में जन क्रान्ति में इनका सहोदर भाई भी सूरज प्रसाद लाल शहीद हुए जो प्रथम शहीद की श्रेणी में है। पूरा परिवार फरारी की दशा में दर-दर की ठोकर खाते रहे। 15 अगस्त सन् 1947 के बाद श्री प्रसाद नगर पालिका बलिया के सभासद का चुनाव लड़े और विजयी हुए और लगातार सन् 1953 तक नगरपालिका सेवक के रूप में नगर के नागरिकों सहित सम्पूर्ण जनपद के नगरवासियों की सेवा निःस्वार्थ रूप से करते रहे। सन् 1964 में जिला कांग्रेस कमेटी, बलिया के अध्यक्ष हुए और इनकी अध्यक्षता में बलिया-बक्सर को पूल से जोड़ने, उ0प्र0 बिहार सीमा विवाद का स्थाई हल का एक प्रतिनिधि मंडल भारत सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू से मिला और उन्होंने ”त्रिवेदी आयोग“ बनाकर इस मूर्त रूप दिया।

सन् 1967 से 1977 तक स्व0 चन्द्रिका प्रसाद जी बलिया लोकसभा से लगातार ग्यारह वर्षो तक प्रतिनिधित्व किया। गंगा, घाघरा, टोंस के कटान से जनपद को बचाने के लिए उन्होंने संसद में आवाज बुलंद किया, बलिया से वाराणसी और बलिया से छपरा रेलवे छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित करने के लिए संसद में आवाज उठाए, उस पर तत्कालीन भारत के प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इस मुर्त रूप देने का आश्वासन दिया। लेकिन 1977 में जय प्रकाश नारायण की आंधी में मुरार देसाई की सरकार आयी और कांग्रेस के समस्त कार्यो को ठण्डे बस्ते में डाल दिया।

इसके बाद 1977 से अपने मृत्यु के समय तक बलिया की जनता की सेवा स्व0 चन्द्रिका प्रसाद देश और प्रदेश स्तर पर करते रहे। इनकी मृत्यु 13 सितम्बर 1999 में हुई। सादा जीवन उच्च विचार के पोषक के रूप में स्व0 चन्द्रिका प्रसाद ने जो धरोहर जनपद वासियों को दिया है आज के युवा पीढ़ी को उससे प्रेरणा लेकर कार्य करने की आवश्यकता है और यही आज के समय की सर्वाधिक मांग है। इन शब्दों के साथ हम स्व0 चन्द्रिका प्रसाद को शत्-शत् नमन करते है।

By-Ajit Ojha

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